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चितराल की कला पश्चिमी बाज़ारों में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरी पाकिस्तान के हिंदुकुश पहाड़ों के बीच ठिठुरन पैदा करने वाली सर्द शाम को लोआरी दर्रे से आठ साए निकलते हैं. सात कुली, आठ सूटकेस और एक ऑस्ट्रेलियाई फैशन डिजाइनर. ये सभी बर्फ़ से ढका 3000 मीटर लंबा रास्ता तय कर रहे हैं और आठ सूटकेसों में है गर्मियों में पहने जाने वाले स्थानीय कला में सजे कपड़े जिनकी अमरीका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में ज़बर्दस्त मांग है. पाकिस्तान के चितराल शहर से दो साल पहले कारवां नाम का नया ब्रांड शुरु करने वाली कैथी ब्रेड बताती हैं " यहां सर्दियां बहुत कठिन होती हैं और इस समय काम करना असंभव सा हो जाता है." दिक्कत और दिक्कत जब इस इलाक़े में बर्फ़ पड़ती है तो सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और एक महीने के लिए विमान और बसें सबकुछ बंद हो जाता है. ऐसे में कैथी के पास पैदल रास्ता नापने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचता.
दो साल पहले जब वो अपने बिजनेस मैनेजर और दोस्त किर्स्टन एन्सवर्थ के साथ यहां आई थीं तो बस एक बैग था और कपड़ों का व्यापार करने की तमन्ना. दो साल के बाद उनके डिजाइन किए गए कपड़े ऑस्ट्रेलिया से लेकर सैन फांसिस्को, लॉस एंजेल्स और लंदन की बुटीकों में मिल रहे हैं. अगले साल उनका इरादा है मध्य पूर्व के बाज़ारों में पाकिस्तान की लोक कलाओं से सजे इन कपड़ों को ले जाने का. ये हिंदुकुश के पहाड़ों में रहने वाली महिलाओं को काम देते हैं और वो अपनी चित्रकला और सुई धागे का कमाल कपड़ों पर दिखाती हैं. इन महिलाओं के पास कोई और आमदनी का साधन भी नहीं है. इस समय चितराल की क़रीब 400 महिलाएं इनके लिए काम करती है. कारवां के लिए एम्ब्रायडरी का काम करने वाली विधवा गुल निशा कहती है " अपने घर में एक मैं ही कमाने वाली हूं. मेरे चार बच्चे हैं. अगर यह काम न मिले तो पेट पालने की दिक्कत हो जाएगी." एक अन्य महिला ज़ुल्फिया कहती है कि वो अपने पैसे का उपयोग अपने आठ बच्चों को शिक्षा देने के लिए करती हैं. कॉटेज उद्योग दोनों ऑस्ट्रेलियाई डिजाइनरों को यहां के हथकरघा परंपरा से लाभ हो रहा है क्योंकि इस स्थानीय कला को पश्चिमी देशों के बाज़ारों में बहुत अधिक पसंद किया जाता है. कैथी कहती हैं " एक एक कपड़े पर एम्ब्रायडरी में घंटों समय लगाया जाता है. ये महिलाएं मानो किसी को उपहार देने के लिए मेहनत करती हैं जो बहुत अच्छा लगता है. "
सबसे अच्छा क्या कैथी को उस्मानिया स्टीच नामक डिजाइन बहुत पसंद है और वो इन्होंने इन्हीं महिलाओं से सीखा है. इस साल वो इसी डिजाइन का इस्तेमाल अपने कई कपड़ों पर कर रही हैं. उनकी पसंदीदा स्कर्ट है किस्सा ख्वानी कहानी नामक स्कर्ट जिस पर पेशावर के एक बाज़ार की कहानी से जुड़े दृश्य बनाए गए हैं. किस्सा ख़्वानी संभवत: कराची का वही बाज़ार है जहां से एम्ब्रायडरी के लिए विभिन्न सामानों की खरीदारी की जाती है. किस्सा ख्वानी स्कर्ट को जब कैथी दर्ज़ियों तक ले गईं तो कुछ लोग उन पर हंसने लगे. बाद में कैथी ने पाया कि डिजाइन में एक मस्जिद है और उसे स्कर्ट पर बनाने से लोगो को थोड़ी आपत्ति थी. कैथी इस तरह की समस्याओं को निपटाने के लिए खासा प्रयास करती हैं ताकि संतुलन रखा जा सके. कैथी ने मस्जिद की जगह मिलती जुलती कोई और आकृति बना दी और बस दर्ज़ी खुश. कैथी और उनके दोस्त का मानना है कि इस काम से न केवल उन्हें बल्कि इलाक़े के लोगों को भी फ़ायदा हो रहा है. |
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