BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 25 मई, 2005 को 14:45 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सुनील दत्त ने दुनिया को अलविदा कहा
सुनील दत्त की शवयात्रा
सुनील दत्त की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में उनके चाहनेवाले शामिल हुए
करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में अपनी जगह बनाकर जहाँ को छोड़ गए सुनील दत्त का मुंबई में अंतिम संस्कार कर दिया गया.

उन्होंने बुधवार 25 मई 2005 को 74 वर्ष की आयु में मुंबई में अंतिम साँसें लीं जहाँ अपने घर पर दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया.

उनके निधन की ख़बर आते ही मुंबई में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए प्रख्यात हस्तियों के साथ-साथ आम लोग भी उमड़ पड़े.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एक विशेष विमान से केंद्रीय मंत्रियों शरद पवार, प्रणब मुखर्जी और शिवराज पाटिल के साथ दिल्ली से मुंबई आए.

 कहीं भी कोई सांप्रदायिक समस्या आई हो तो वहाँ पहुँचनेवाले वे पहले व्यक्ति होते थे
सोनिया गाँधी

इन नेताओं ने मुंबई में दत्त साहब के पाली हिल घर जाकर उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए. सुनील दत्त मनमोहन सिंह सरकार में युवा और खेल मामलों के मंत्री थे.

सोनिया गाँधी ने दिल्ली में उनको याद करते हुए कहा,"निश्चित रूप से उन्होंने भारतीय सिनेमा और राजनीति में शानदार भूमिका निभाई. कहीं भी कोई सांप्रदायिक समस्या आई हो तो वहाँ पहुँचनेवाले वे पहले व्यक्ति होते थे".

राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम, उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सुनील दत्त के निधन पर शोक जताया है.

फ़िल्म जगत

दत्त साहब को श्रद्धांजलि देने के लिए एक तरह से फ़िल्मी दुनिया की सभी प्रख्यात हस्तियाँ उनके घर पहुँचे.

 उनके जीवन को केवल एक पंक्ति में समेटा जा सकता है- साथ रहे तो उड़ान भरेंगे, अलग हुए गिर जाएँगे
महेश भट्ट

इनमें कुछ प्रमुख नाम रहेः अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन, यश चोपड़ा, धर्मेंद्र, बॉबी देओल, जितेंद्र, सलमान ख़ान, अनिल कपूर, बोनी कपूर, ओम पुरी, महेश भट्ट, जावेद अख़्तर, शबाना आज़मी, गुलज़ार, अनुपम खेर, गोविंदा और अन्य.

गोविंदा उन्हें याद करते हुए कहते हैं,"हम सब तो उनके प्रेम की छाया में पले हैं. हमने कितना कुछ सीखा है उनसे".

महेश भट्ट ने कहा,"उनके जीवन को केवल एक पंक्ति में समेटा जा सकता है- साथ रहे तो उड़ान भरेंगे, अलग हुए गिर जाएँगे".

सुनील दत्त का जन्म 6 जून, 1929 को झेलम ज़िले के ख़ुर्द गाँव में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है. विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया.

अपने प्रशंसकों में सुनील दत्त, 'दत्त साहब' के नाम से जाने जाते थे.

प्रख्तात अभिनेत्री नरगिस से विवाह करनेवाले सुनील दत्त अपने पीछे बेटे संजय दत्त के अलावा दो बेटियों को छोड़ गए हैं.

फ़िल्में और राजनीति

उन्होंने 100 से अधिक फ़िल्मों में काम किया. मुन्नाभाई एमबीबीएस उनकी अंतिम फ़िल्म थी जिसमें वे अपने बेटे संजय दत्त के साथ नज़र आए थे.

अभिनय में अमिट छाप छोड़नेवाले सुनील दत्त ने आम जनजीवन में अपनी ईमानदारी और सामाजिक कार्यों में अपने योगदान से अलग जगह बनाई थी.

उन्होंने पंजाब में शांति के लिए मुंबई से अमृतसर तक की पैदल यात्रा की. हाल में दांडी मार्च की 75 वीं जयंती पर आयोजित मार्च में उन्होंने हिस्सा लिया.

सुनील दत्त दक्षिण मुंबई से पाँच बार कांग्रेस के सांसद के रूप में चुने गए.

उन्होंने अपना पहला चुनाव 1984 में जीता था और इस चुनाव में उन्होंने राम जेठमलानी को हराया था.

वो 1989,1991,1999 और 2005 में भी जीते लेकिन उन्होंने 1996 और 1998 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था.

66भीष्म साहनी जैसी जगह
विष्णु खरे कहते हैं कि सुनील दत्त विवादों से परे साफ़ सुथरे व्यक्ति थे.
66एक बहुआयामी व्यक्तित्व
सुनील दत्त अभिनेता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और समर्पित राजनेता थे.
66संघर्ष से भरा जीवन
सुनील दत्त की जीवनी लिख चुकी भावना सोमैया की श्रद्धांजलि.
66दत्त साहब के साथ यात्रा
बीबीसी की टीम को एक बार सुनील दत्त के साथ यात्रा करने का अवसर मिला.
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>