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शनिवार, 14 मई, 2005 को 04:20 GMT तक के समाचार
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बलात्कार मामले में न्यायालय का आदेश

राजस्थान
राजस्थान में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं
भ्रमण पर आई एक जर्मन महिला के साथ जोधपुर में बलात्कार की घटना को राजस्थान उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान करने और मुक़दमे को एक माह में निपटाने का निर्देश दिया है.

महिला संगठनों ने भी औरतों के विरूद्ध बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है.

जर्मन नागरिक 48 वर्षीय सोफ़िया (असली नाम नहीं है) 11 मई को उस वक़्त दो लोगों का तब निशाना बनीं जब वह जोधपुर में अपने होटल जा रही थी.

पुलिस के मुताबिक़ सोफ़िया ने एक टैक्सी किराए पर ली थी. लेकिन टैक्सी चालक और उसका एक साथी सोफ़िया को एक निर्जन स्थान पर ले गए और बलात्कार किया. महिला की चीख पुकार सुनकर लोगों ने टैक्सी चालक पर पथराव किया और पुलिस को ख़बर दी. पुलिस ने दोनों को गिरफ़्तार कर लिया है.

मुआवज़ा

राजस्थान उच्च न्यायालय ने ख़बरों के आधार पर कार्रवाई करते हुए कहा कि पीड़ित महिला इस मुक़दमें के संबंध में जब तक भारत में रहे तब तक सरकार उनका ख़र्च वहन करे.

अदालत ने पीड़ित महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और एक माह के समयबद्ध कार्यक्रम में मुक़दमे की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया.

अदालत ने कहा कि पीड़ित महिला को मुआवज़े के सवाल पर राज्य सरकार को सुनने के बाद अगली सुनवाई पर विचार किया जा सकता है.

उच्च न्यायालय ने घटना के बारे में विधि विज्ञान विशेषज्ञों की रिपोर्ट 16 मई तक उपलब्ध कराने को कहा है. अदालत ने कहा बलात्कार एक गंभीर अपराध है, चाहे वह किसी के साथ घटित हो. हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी घटना से विदेशी पर्यटकों में भय व्याप्त हो सकता है.

उधर जोधपुर के पुलिस अधीक्षक रवि मेहरडा ने बीबीसी को बताया कि दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध शुक्रवार को ही अदालत में चार्जशीट दाखिलकर की गई है.

सोफ़िया अब भी भयभीत हैं और हादसे से ऊबर नहीं पाई है. इस घटना से पर्यटन व्यवसाय पर बुरा असर पड़ सकता है. क्योंकि पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है. राज्य में प्रतिवर्ष 6 लाख़ से ज़्यादा विदेशी सैलानी आते हैं और देशी पर्यटकों की संख्या 70 लाख से अधिक होती है.

सामाजिक कार्य मंत्री कविता श्रीवास्तव का कहना था, "मुख्यमंत्री, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष - तीनों संवैधानिक पदों पर महिलाएँ आसीन हैं. लेकिन इससे औरत की सुरक्षा और सलामती पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा है."

डेढ दशक पहले कथित रूप से बाल विवाह रोकने के प्रयासों में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई भंवरी देवी कहती हैं कि हालात जस के तस है.

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