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गुरुवार, 21 अप्रैल, 2005 को 11:43 GMT तक के समाचार
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जन्म पंजीकरण के लिए अभियान

शिवराज पाटिल अभियान शुरु करते हुए
पहले चरण में सरकार अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर सकी थी
भारत में हर साल पैदा होने वाले हर साल ढाई करोड़ से भी ज़्यादा बच्चे पैदा होते हैं पर उनमें से कोई एक करोड़ बच्चों का पंजीकरण नहीं हो पाता.

यानी सरकारी रिकॉर्ड में उनके बारे में कोई जानकारी ही दर्ज नहीं होती.

और इसकी वजह से सरकार से लेकर स्वयंसेवी संगठनों तक हर स्तर पर कार्यक्रम बनाने और उसे प्रभावी रुप से लागू करने में अनेक व्यावहारिक दिक़्क़तें आती हैं.

इस समस्या का निराकरण करने के लिए केंद्र सरकार ने जन्म पंजीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से पँजीकरण अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत गुरुवार को दिल्ली में की गई.

अभियान की शुरुआत भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने की. इससे पहले 14 नवंबर, 2003 को बाल दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इस अभियान के पहले चरण की शुरुआत की थी.

इस समय बच्चों की एक बड़ी संख्या है जो अपनी ज़िदगी के पहले प्रमाण पत्र से वंचित रह जाते हैं.

अभियान की शुरुआत करते हुए शिवराज पाटिल ने कहा, “हम अपेक्षा करते हैं कि सभी बच्चों का उनके जन्म के साथ ही पंजीकरण हो जाए और वो अपने प्रमाणपत्रों को तमाम सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ उठाने में इस्तेमाल कर सकें.”

 शहरों के लिए यह काम आसान है पर गाँवों के लिए नहीं लेकिन हम पंचायत, आँगनबाड़ी कार्यक्रम और बाकी के तमाम स्थानीय साधनों का इस्तेमाल करेंगे
शिवराज पाटिल

ग़ौरतलब है कि भारत की वर्ष 2000 की जनसंख्या नीति में कहा गया है कि देश में शत प्रतिशत जन्म पंजीकरण के लक्ष्य को वर्ष 2010 तक पूरा कर लिया जाएगा.

पर सुदूर गाँवों तक अभियान लोगों तक कैसे पहुँचेगा इस सवाल पर वे बताते हैं, “शहरों के लिए यह काम आसान है पर गाँवों के लिए नहीं लेकिन हम पंचायत, आँगनबाड़ी कार्यक्रम और बाकी के तमाम स्थानीय साधनों का इस्तेमाल करेंगे.”

पर इस अभियान की आवश्यकता क्यों पड़ी, पूछने पर भारत के रजिस्ट्रार जनरल डीके सिकरी ने कहा, “पहले चरण से इस अभियान की शुरुआत हुई थी लेकिन उस समय अभियान का पहला दौर था और राज्य उससे सीख रहे थे.”

इस चरण में तीन करोड़ बच्चों का ही पंजीयन हो सका था.

सरकार की इस योजना में यूनिसेफ़ भी एक बड़ा घटक है. हमने यूनिसेफ़ के मुख्य योजनाकार रॉबर्ट जैन्किंस ने बातचीत की तो उन्होंने बताया, “हमारे सामने दो लक्ष्य हैं, पहला तो उन बच्चों का पंजीकरण जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है और फिर ऐसी व्यवस्था बनाना कि जन्म लेते ही बच्चे का पंजीकरण हो सके.”

देश की आज़ादी के 56 सालों बाद शुरू हुआ जन्म के पंजीकरण का यह अभियान अपने दूसरे चरण की शुरुआत कर चुका है. देखना यह है कि कितने राज्य और कितने बच्चे इससे लाभान्वित हो पाते हैं.

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