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प्रबुद्ध लोग तस्लीमा के पक्ष में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल के 50 प्रबुद्ध लोगों ने बांग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन को भारत की नागरिकता देने के पक्ष में एक अपील पर हस्ताक्षर किए हैं. यह अपील प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धादेव भट्टाचार्य से की गई है. लेखक सुनील गंगोपाध्याय, सांख्य घोष, शिरशेंदु मुखोपाध्याय, दिब्येंदु पालित, महाश्वेता देवी और शिव नारायण रे, कवि जय गोस्वामी और अर्थशास्त्री अमलान दत्ता, कलाकार ईश मोहम्मद और शानू लाहिड़ी और पत्रकार मानश घोष जैसे लोगों ने इस अपील पर हस्ताक्षर किए हैं. महाश्वेता देवी का कहना था कि भारत सरकार को इसमें रोड़ा नहीं अटकाना चाहिए और बिना लालफीताशाही के तस्लीमा नसरीन को नागरिकता दे देनी चाहिए. ग़ौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने संकेत दिए थे कि तस्लीमा नसरीन को भारतीय नागरिकता तो नहीं दी जाएगी पर उन्हें लंबी अवधि के लिए निवासी प्रमाण-पत्र दिया जा सकता है. अपील इसके पहले तस्लीमा नसरीन ने ख़ुद को भारत की नागरिकता दिए जाने के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था. तस्लीमा नसरीन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि अगर वह पश्चिमी देशों में ही रहती रहीं तो उससे उनका लेखन कार्य प्रभावित होगा. नसरीन ने कहा था कि वह बांग्लादेश वापस नहीं जा सकतीं इसलिए कोलकाता में रहना चाहती हैं क्योंकि कोलकाता को वह अपना दूसरा घर मानती हैं. नसरीन ने अपने पत्र में कहा कि 1994 में बांग्लादेश में अपना घर छोड़ने के बाद से ही वह कट्टरपंथियों की धमकियों के साए में जीने के लिए मजबूर हैं. उन्होंने कहा है कि उन्हें यूरोपीय संघ ने उसी समय शरण और नागरिकता दी थी जब उन्हें बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. |
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