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तस्लीमा को छह महीने का वीज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन भारत की नागरिकता चाहती थीं लेकिन भारत सरकार ने उन्हें फ़िलहाल छह महीने का वीज़ा दिया है. भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने अपने इस फ़ैसले से तस्लीमा नसरीन को अवगत करवा दिया है. अधिकारियों का कहना है कि नियमों के तहत तस्लीमा नागरिकता की पात्र नहीं हैं. तस्लीमा नसरीन ने गत 17 फ़रवरी को नागरिकता के लिए आवेदन किया था. अधिकारियों का कहना है कि सामान्य रुप से भारत की नागरिकता उसी व्यक्ति को दी जा सकती है जो 11 साल से भारत में ही रह रहा हो. लेकिन तस्लीमा नसरीन यह शर्त पूरा नहीं करतीं. बीबीसी से बातचीत में तस्लीमा ने कहा था कि उन्हे पश्चिम बंगाल से लगाव है और वे इसे अपना घर बनाना चाहती हैं. तस्लीमा इस वक्त अस्थाई रूप से कोलकाता में रह रही हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों से वे अपने देश बंग्लादेश के बजाए भारत अथवा यूरोप में रह रही हैं. डॉक्टर से लेखिका बनीं तसलीमा नसरीन को बांग्लादेश की अग्रणी नारीवादी लेखिकाओं में गिना जाता है. तस्लीमा 1993 में अपनी पहली और सबसे विवादास्पद पुस्तक 'लज्जा' के कारण सुर्खियों में आईं थीं. इस्लामी कट्टरवादियों ने तस्लीमा पर ईश निंदा का आरोप लगाकर उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था. मौत के फ़तवे से बचने के लिए तसलीमा को अपना देश छोड़ना पड़ा था और वे काफ़ी अर्से तक स्वीडन में रहीं. इसके बाद 1999 में प्रकाशित उनकी किताब 'माई गर्लहुड' पर भी बांग्लादेश में प्रतिबंध लगा दिया गया. उनके नारीवादी लेखों को लेकर भी बांग्लादेश में ख़ासा बवाल रहा है. |
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