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यात्रा समाप्ति पर दांडी पहुँचीं सोनिया गाँधी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महात्मा गाँधी की ऐतिहासिक दांडी यात्रा की 75वीं जयंती पर शुरू की गई कांग्रेस की यात्रा आज उसी रास्ते होते हुए दांडी पहुँची. ये यात्रा 12 मार्च को शुरू हुई थी और 26 दिन बाद उसी दांडी गाँव में पहुँची जहाँ महात्मा गाँधी ने 1930 में नमक बनाकर नमक क़ानून तोड़ा था. भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में इस घटना को नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है. इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दांडी मार्च में हिस्सा लेने वालों को संबोधित किया. सोनिया गाँधी ने यात्रा के अंतिम चरण में मटवाडा गाँव से दांडी तक की पाँच किलोमीटर की दूरी में यात्रा का नेतृत्व किया. यात्रा
सोनिया गाँधी दांडी तक जाने के अंतिम पाँच किलोमीटर के रास्ते में महात्मा गाँधी से संबंधित अनेक स्मारकों पर गईं जिनमें सूफ़ी मंज़िल भी था जहाँ गाँधी ने क़ानून तोड़ने से पहले आख़िरी रात काटी थी. ये घर महात्मा गाँधी के पुराने साथी अयूब तय्यबजी का था जिन्होंने दक्षिण अफ़्रीका में गाँधी के आँदोलन में उनका साथ दिया था. साथ ही सोनिया गाँधी यात्रा में शामिल उन लोगों से मिलीं जो अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से 384 किलोमीटर की दूरी तय कर दांडी तक पहुँचे. महात्मा गाँधी अपनी यात्रा में 78 समर्थकों को लेकर दांडी पहुँचे थे और रास्ते में हज़ारों लोगों ने उनका साथ दिया था. दांडी यात्रा का दोबारा आयोजन कांग्रेस पार्टी और कुछ गाँधीवादी संस्थानों ने मिलकर किया है. अब तक दांडी यात्रा में देश और विदेश के कई लोगों ने हिस्सा लिया है जिनमें महात्मा गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी भी शामिल हैं. |
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