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दांडी यात्रा के अंत में शामिल होंगी सोनिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ऐतिहासिक दांडी यात्रा की समाप्ति के अवसर पर मौजूद रहेंगे. दांडी यात्रा 6 अप्रैल को समाप्त हो रही है. इस दिन सोनिया गाँधी महात्मा गाँधी की तरह दांडी के तट पर विशेष रूप से निर्मित नमक मुट्ठी में भरेंगी. सोनिया गाँधी ने 12 मार्च को दांडी यात्रा को साबरमती आश्रम से रवाना किया था. उनका कहना था कि महात्मा गाँधी इतिहास नहीं भविष्य के लिए हैं. उनका जीवन एक संदेश है. सोनिया गाँधी ने घोषणा की थी कि उन्हें गाँधीजी की विचारधारा में पूरा भरोसा है. दांडी यात्रा की समाप्ति के अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्रियों के मौजूद रहने की उम्मीद है. अब तक दांडी यात्रा में देश और विदेश के कई लोगों ने हिस्सा लिया है. इसमें महात्मा गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी भी शामिल हुए थे. ऐतिहासिक यात्रा मौजूदा यात्रा नमक बनाने पर लगी पाबंदी के विरोध में महात्मा गाँधी की दांडी यात्रा की 75वीं सालगिरह पर शुरू की गई. महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू किया था और 25 दिन बाद 241 मील की दूरी तय कर पाँच अप्रैल को दांडी पहुँचे थे. अगले दिन यानी 6 मार्च, 1930 को उन्होंने नमक बनाकर क़ानून तोड़ा जिसने भारत के स्वाधीनता संग्राम में एक नई ऊर्जा फूँकी थी. सन् 1930 में महात्मा गाँधी के नेतृत्व में निकाली गई दांडी यात्रा का दोबारा आयोजन कांग्रेस पार्टी और कुछ गाँधीवादी संस्थानों ने मिलकर किया है. इसे नमक सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता हैं. |
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