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हथियार अभियान का अंतिम चरण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में हज़ारों लड़ाकों से हथियार वापस लेने का अभियान अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है और इस अभियान के तहत अभी तक क़रीब 45 हज़ार लड़ाके अपने हथियार डाल चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र ने क़रीब 18 महीने पहले यह अभियान शुरू किया था जिसका अंतिम दौर चार महीने चलेगा. अंतिम चरण में ख़ासतौर से राजधानी काबुल के आसपास वाले इलाक़ों में लड़ाकों से हथियार इकट्ठे किए जाएंगे. इस अभियान के तहत जो लड़ाके हथियार डाल रहे हैं उन्हें सामान्य जीवन जीने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा उन हज़ारों लड़ाकों से ही है जो देश के विभिन्न इलाक़ों में सैन्य कमांडरों के लिए काम करते हैं. अभी यह पता नहीं चला है कि इस तरह के कितने निजी सैनिक हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र की योजना के तहत क़रीब साठ हज़ार लड़ाकों के हथियार लिए जाने हैं. संयुक्त राष्ट्र की इस योजना के प्रवक्ता रिक ग्रांट ने कहा कि यह लक्ष्य इसी साल जून तक हासिल करने की आशा है. रिक ग्रांट ने बताया कि इस योजना के तहत देश भर से भारी हथियार भी इकट्ठे किए जा रहे हैं जिनमें टैंक और रॉकेट भी शामिल हैं. अफ़ग़ानिस्तान में हथियार रखने की संस्कृति की वजह से यह दुनिया में सबसे ज़्यादा हथियारों वाले देशों में से एक है और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से कमांडरों ने अपने हथियारों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. |
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