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अपनी रंगत में नज़र आए लालू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रेल मंत्री लालू यादव ने जब रेल बजट पेश किया तो राजनीति ज़्यादा हावी नज़र आई. बजट भाषण की शुरूआत में जब एनडीए के नेता सदन के वॉक आउट कर रहे थे तब लालू प्रसाद ने कहा कि वो गोधरा पर रिपोर्ट रखना चाहते हैं इसलिए एनडीए नेता बजट का बहिष्कार कर उससे बचाव की भूमिका बना रहे हैं. हालांकि कहीं-कहीं लालू पर बिहार चुनाव की थकान साफ़ नज़र आई. इस शोरशराबे पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी जब नाराज़गी जता रहे थे तो लालू ने उनसे कहा कि इन सबको (एनडीए नेताओं को) जाने दीजिए. 'पीठ दिखाओ' बजट पेश करने के दौरान लालू ने शुरुआत में एनडीए के बहिष्कार के दौरान कटाक्ष करते हुए कहा,' जाओ- जाओ, पीठ दिखाओ. इनके पास पीठ दिखाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है.' लालू यादव का यह दूसरा रेल बजट था.
रेल मंत्री ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने रेल भाड़े में वृद्धि नहीं की थी तो अभिजात्य वर्ग ने इसकी आलोचना की थी. लेकिन रेलवे ने बेहतर प्रदर्शन किया. इस बार वो फिर ग़रीबों को ध्यान में रखते हुए रेल भाड़ा नहीं बढ़ा रहे हैं फिर उन्होंने कवि बाबा नागार्जुन की कविता का उल्लेख किया,'' जान लो भैया, ग़रीबी की एक होत जात, उसी के हुकुम से, हिलेंगे एक- एक पात.'' लालू ने अपने भाषण में कई जगह कविताओं की पंक्तियों का उल्लेख किया. रेलवे की प्रगति पर उनका कहना था,'' जीवन के हर पथ पर माली पुष्प नहीं बिखराता है, प्रगति का पथ अक्सर पथरीला ही होता है.'' इस पर सांसदों ने तालियां बजाईं. लालू ने इन पंक्तियों को कांग्रेस सांसद अजीत जोगी के अनुरोध पर इन्हें दुबारा सुनाया. अजित जोगी व्हील चेयर पर लोक सभा में आए थे. माल भाड़े को युक्तसंगत और पारदर्शी बनाने के प्रस्ताव पर भी उन्होंने दो पंक्तियां पढ़ी, ''पा लेंगे, आख़िर मंज़िल राहों की मोहताज नहीं, साथ हो उम्मीद का, कल होगा वही जो आज नहीं.'' उन्होंने अपने भाषण के बीच में दुष्यंत कुमार का एक शेर भी पढ़ा,'' सिर्फ़ हंगामा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.'' |
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