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कर ढाँचे में कोई बदलाव नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने अपने अंतरिम बजट में मध्यमवर्ग के लिए कई घोषणाएं की हैं. कर ढाँचे में किसी बदलाव की पेशकश नहीं की गई है और सरकारी कर्मचारियों का पचास प्रतिशत तक महँगाई भत्ता मूल वेतन में जोड़ने की घोषणा की गई है. इस साल मार्च तक देश की अर्थव्यवस्था में साढ़े सात से आठ प्रतिशत तक की वृद्धि होने का अनुमान व्यक्त किया गया है. वित्त मंत्री ने संसद को बताया, "इस साल मुद्रा स्फीति चार से साढ़े चार प्रतिशत तक रही है जिससे सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोत्तरी से इसके साढ़े सात से आठ प्रतिशत तक रहने का अनुमान है. काँग्रेस सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों की आपत्ति की वजह से बजट पेश करने में कुछ देरी हुई. विपक्षी दलों ने इस अंतरिम बजट को असंवैधानिक क़रार दिया. काँग्रेस के मुख्य व्हिप प्रियरंजन दास मुंशी ने कहा कि संविधान में अंतरिम बजट पेश करने का प्रावधान सिर्फ़ देश पर बाहरी आक्रमण या किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में है. मुंशी और सीपीएम सांसद सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि इस समय इन दोनों में से कोई भी स्थिति नहीं है और सरकार सिर्फ़ मतदाताओं को लुभाने के लिए यह बजट पेश किया जा रहा है. माना जाता है कि सिंह पर उनकी भारतीय जनता पार्टी का दबाव है कि अब जबकि कुछ महीने में ही देश में आम चुनाव होने हैं और बजट भी इसी नज़रिए का रहने की संभावना है. भारत में आम तौर पर फरवरी महीने के अंत में बजट पेश किया जाता है. लेकिन लोकसभा को भंग किए जाने के मंत्रिमंडल के प्रस्ताव के बाद सरकार के सामने अंतरिम बजट पेश किए जाने की बाध्यता आ गई. छह फरवरी को लोकसभा भंग किए जाने का प्रस्ताव है. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन का मानना है कि समय पूर्व चुनाव का सर्वाधिक फ़ायदा उसे ही होगा. |
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