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संसद का बजट सत्र शुरु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संसद का बजट सत्र शुक्रवार को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अभिभाषण से शुरु हो गया है. यह चौदहवीं लोकसभा का चौथा सत्र है. यह सत्र परंपरागत रुप से दो हिस्सों में होगा. इस सत्र के शुरु होने के बाद ही तीन राज्यों में हुए चुनावों के परिणाम आ जाएँगे और संभावना है कि इन चुनाव परिणामों का असर केंद्र की गठबंधन सरकार पर भी साफ़ दिखाई देगा. चुनाव परिणाम 27 फ़रवरी को आने हैं. इसके अलावा इस सत्र में केंद्र में सत्तारुढ़ यूपीए और उसे समर्थन दे रहे वामपंथी दलों में खींचतान साफ़ दिखाई पड़ने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि वामपंथी दलों ने सरकार की बहुत सारी आर्थिक नीतियों पर असहमति और नाराज़गी ज़ाहिर की है और कहा है कि वे सरकार का विरोध करने से नहीं हिचकेंगे. इस सत्र का पहला हिस्सा 24 मार्च तक चलेगा और इसमें मूल रुप से आर्थिक सर्वेक्षण, रेल बजट और आम बजट पेश होगा और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव होगा. 24 दिनों के अंतराल के बाद दूसरा हिस्सा 18 अप्रैल से शरु होगा और 13 मई तक चलेगा इस हिस्से में आर्थिक गतिविधियों के अलावा कई विधायी कार्य होंगे. इस दौरान संसद की कुल 39 बैठकें होंगी. बजट संसदीय कार्य मंत्री ग़ुलामनबी आज़ाद के अनुसार रेल बजट 26 फ़रवरी को और आम बजट 28 फ़रवरी को पेश होगा. दोनों ही बजट सुबह 11 बजे पेश होंगे. इसके अलावा इस सत्र में उन तीन अध्यादेशों को क़ानून बनाने के लिए विधेयक लाए जाएँगे जिसमें पेटेंट सबसे महत्वपूर्ण है. पत्रकारों के सवालों के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस सत्र में न तो महिला आरक्षण विधेयक लाया जा रहा है और न लोकपाल विधेयक. महिला आरक्षण विधेयक पर ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि इस पर अभी चर्चा चल रही है. उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की है कि शीतकालीन सत्र की तरह ही इस सत्र में भी कामकाज होगा. चुनाव का असर बिहार, झारखंड और हरियाणा में हाल ही में संपन्न चुनावों के परिणाम 27 फ़रवरी को आने वाले हैं. हरियाणा को छोड़ दें तो बाक़ी दोनों राज्यों के परिणामों का सीधा असर केंद्र के सत्ताधारी गठबंधन यूपीए पर सीधे होने वाला है. यदि बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी सत्ता में चाहे लौटे या न लौटे रामविलास पासवान के लिए गठबंधन में बने रहने के लिए वे कठिनाई पैदा कर सकते हैं. इसी तरह झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के सत्ता में आने न आने का असर भी केंद्रीय गठबंधन पर दिखाई देगा. |
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