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आख़िरी दौर में सबने ताक़त झोंकी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में 23 तारीख़ को आठ ज़िलों की 28 सीटों पर मतदान होगा जिसके लिए राज्य के तीनों प्रमुख दलों भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मानो अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है. इनमें से 18 सीटें संथाल-परगना में हैं, जबकि बाकी 10 कोयलांचल के नाम से प्रसिद्ध उत्तरी झारखंड में. भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित अपने सभी बड़े नेताओं को इन इलाक़ों में उतार रखा है, वहीं कांग्रेस की तरफ़ से प्रचार करने वाले दिग्गजों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी शामिल हैं. राज्य के जिन इलाक़ों में तीसरे चरण का चुनाव हो रहा है उन्हें आमतौर पर कांग्रेस और झामुमो के गढ़ के रूप में जाना जाता है, लेकिन भाजपा के नेता इसमें सेंध लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं. मुक़ाबला दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन और असंतुष्ट झामुमो नेता स्टीफ़न मरांडी के बीच मुक़ाबला दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है. चुनाव पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों की रूचि इस बात में भी है कि स्टीफ़न के पक्ष में ईसाई धर्म के एक प्रमुख कार्डिनल के बयान का संथाल परगना के अन्य ज़िलों में प्रभाव पड़ता है या नहीं.
दूसरी तरफ़ झारखंड के मूल निवासियों के बारे में राज्य की राजग सरकार की नीति को उदार बनाने का वायदा कर भाजपा ने कोयलांचल में बाहर से आकर रहने वाले लोगों को आकर्षित करने का प्रयास किया है. राज्य के जिन इलाक़ों में तीसरे दौर का मतदान हो रहा है उनमें से अधिकांश में नक्सली सक्रिय रहे हैं, और उन्होंने चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर रखी है. इसके अलावा कोयलांचल में आपराधिक छवि के कई उम्मीदवारों के मैदान में होने के कारण भी पुलिस के लिए हिंसारहित चुनाव सुनिश्चित करना नि:संदेह एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है. पहले दौर के चुनाव में झारखंड में हिंसक घटनाओं के बाद दूसरा दौर कुल मिलाकर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, और इसके लिए रक्षा बलों को ख़ूब वाहवाही मिली. |
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