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हरियाणा में मतगणना चार दिन पहले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव आयोग ने हरियाणा में मतगणना निर्धारित समय से चार दिन पहले यानी 23 फ़रवरी को करवाने का निर्णय लिया है. पहले मतगणना बिहार और झारखंड की मतगणना के साथ ही 27 फ़रवरी को होनी थी. 23 फ़रवरी को ही बिहार और झारखंड में तीसरे चरण का मतदान होना है. मतदान खत्म होने के बाद शाम चार बजे से हरियाणा में वोटों की गिनती शुरु होगी. इंडियन नेशनल लोकदल के नेता और हरियाणा के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला पहले ही मतगणना पहले करवाने की माँग कर रहे थे. कारण चुनाव आयोग ने हालांकि अपने इस निर्णय का कोई कारण नहीं बताया है. लेकिन माना जा रहा है कि हरियाणा में मतगणना पहले हो जाने से वहाँ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों का उपयोग बिहार और हरियाणा में मतगणना के दौरान किया जा सकेगा. दूसरे, शायद मतगणना पहले करवाकर आयोग चुनाव और मतगणना की तिथि में लंबे अंतर को कुछ कम करना चाहता है. आयोग ने कहा है कि सभी पीठासीन अधिकारियों और प्रत्याशियों को इसकी सूचना दे दी जाए. चौटाला का आरोप उधर मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ तलवार खींच रखी है.
मतगणना की इस घोषणा से पहले उन्होंने चंडीगढ़ में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख कांग्रेस के इशारे पर काम कर रही है. वे चुनाव की तारीख़ों की घोषणा होने के बाद से ही आयोग से नाराज़ रहे हैं. उनका आरोप है कि हरियाणा में पहले चरण में चुनाव करवाने का निर्णय इसलिए लिया गया ताकि वे राज्य में चल रहे विकास के काम पूरे न करवा सकें. उल्लेखनीय है कि हरियाणा तीन चरणों के विधानसभा चुनाव में पहले चरण में था और वहाँ आचार संहिता 17 दिसंबर से लागू हो गई थी. ओमप्रकाश चौटाला ने चुनाव आयोग से अनुमति माँगी थी कि उन लोगों को नौकरी दे दी जाए जिनका चयन पहले हो चुका है. लेकिन यह मामला आख़िर हाईकोर्ट तक चला गया. |
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