|
'बेबी-81' का फ़ैसला डीएनए के ज़रिए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंद महासागर में गत 26 दिसंबर को आए भूकंप और उसके बाद उठी सुनामी लहरों से हुई तबाही के निशान ख़त्म होने में तो बहुत वक़्त लगेगा लेकिन उन निशानों की परछाइयाँ अलग-अलग रूप में देखने को मिल रही हैं. श्रीलंका में एक घटना ऐसी भी हुई है कि एक बच्ची को पाने के लिए नौ दंपतियों ने दावा किया. एक दंपति ने तो बुधवार को अस्पताल से बच्चा ज़बरदस्ती हासिल करने की कोशिश की. इन दावों को देखते हुए इस बच्ची को 'बेबी-81' का नाम दिया गया है और श्रीलंका के पूर्वी क़स्बे कलमुनाई के एक जज ने इस मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया है. इस बच्ची को बेबी-81 नाम इसलिए दिया गया क्योंकि सुनामी तबाही वाले दिन कलमुनाई के अस्पताल में भर्ती होने वाली वह 81वीं मरीज़ थी. बेबी-81 को पुलिस संरक्षण में रखा गया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष - यूनिसेफ़ ने कहा है कि वह डीएनए परीक्षण को लाग कराने में मदद करेगा. मुरुगुपिल्लै जयराज और उनकी पत्नी जूनिथा इस बच्ची को लेने के लिए अस्पताल में घुस गए थे जिसके लिए उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था, बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. पुलिस ने कहा है कि जयराज ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इस बच्ची को पाने के लिए क़ानूनी दावा किया है. कलमुनाई की अदालत ने गुरुवार को कहा कि डीएनए टेस्ट अगले सप्ताह बुधवार को राजधानी कोलंबो में होंगे जिमसें यूनिसेफ़ ने मदद की पेशकश की है. डीएनए टेस्ट की ख़बर सुनने पर जयराज और उनकी पत्नी जूनिथा फूटफूटकर रोने लगे और उन्होंने कहा कि बच्ची को हासिल करने में अभी और एक सप्ताह का समय लगेगा. यूनिसेफ़ ने कहा है कि बच्ची और दंपति को कोलंबो ले जाने के लिए वह वाहन उपलब्ध कराएगा और दंपति को मानसिक सहायता भी दी जाएगी. परीक्षण के दिन ही उसका नतीजा भी आ जाएगा और तमाम अटकलों पर लगाम लग जाएगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||