| मेले में भगदड़, 300 से अधिक मौतें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में एक धार्मिक मेले में आग लगने के बाद मची भगदड़ के कारण तीन सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई और क़रीब इतने ही लोग घायल हो गए. मंगलवार को दोपहर में हुई इस दुर्घटना में मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे हैं. आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि शायद शॉर्ट सर्किट के कारण यह आग लगी. वाई नाम की जगह पर पहाड़ी पर स्थित कालूदेवी के मंदिर पर लगने वाले इस वार्षिक मेले में उस दुर्घटना के समय कोई तीन लाख लोग थे. स्थानीय पत्रकारों का कहना का कहना है कि मेले के रास्ते में बनी दुकानों में आग लगी और धुँआ और लपटें दिखाई देने लगीं. उनका कहना है कि कुछ दुकानों में रखे गैस सिलेंडरों में विस्फोट की भी बातें की जा रही हैं. आग और विस्फोट के कारण लोग इधर उधर भागने लगे और भगदड़ मच गई. राहत कार्य कठिन पहाड़ी पर स्थित मांढरदेवी के मंदिर पर लाखों लोग हर साल दर्शन के लिए आते हैं जिसे कालूदेवी की यात्रा कहा जाता है. मंदिर शहर से दूर पहाड़ी पर स्थित है और इसी के कारण राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन को बेहद परेशानी हुई. ख़बरें हैं कि आग बुझाने के लिए अग्निशमन दस्ते को पहुँचने में भी घंटों का समय लग गया. घटनास्थल पर मौजूद बीबीसी संवाददाता जयश्री बजोरिया का कहना है कि रात तक लगभग सभी घायलों को अस्पताल पहुँचा दिया गया था और उनका इलाज शुरु कर दिया गया था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अभी भी लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों की तलाश में वहाँ पहुँच रहे हैं. वे पहले घायलों में उनको तलाश रहे हैं फिर लाशों के बीच उनको ढूढ़ने का प्रयास कर रहे हैं. कई लोगों के रिश्तेदारों का अभी भी पता नहीं चल पा रहा है. महाराष्ट्र में अधिकारियों का कहना है कि मेले के दौरान भगदड़ मचने से 300 लोगों की मौत हो गई है. मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएँ भी हैं. पुलिस का कहना है कि शुरुआती संकेतों के अनुसार आग लगने के कारण भगदड़ मची. अधिकारियों का कहना है कि ज़्यादातर लोग भगदड़ में दबने के कारण मारे गए. जबकि कई लोगों की जलने से मौत हो गई. स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि मेले में राज्य भर से क़रीब तीन लाख श्रद्धालु 15 दिनों तक चलने वाले इस मेले में एकत्रित हुए थे. मौक़ा इस साल मौसम और फ़सल अच्छे होने की वजह से ज़्यादा श्रद्धालु इस मेले में आए मंगलवार को चंद्र पूर्णिमा के मौक़े पर मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का ताँता लग गया था. क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक केके पाठक ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, "मंदिर के पास एक अस्थाई दुकान में आग लगने से लोगों में दहशत फैल गई और उन्होंने इधर-उधर भागना शुरू कर दिया जिससे भगदड़ मच गई." अगस्त, 2003 में नासिक में एक नदी के किनारे लगे ऐसे ही मेले में भगदड़ मचने से कम से कम 39 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी. उससे पहले 1999 में दक्षिण भारत में एक मंदिर के पास एक सुरक्षा रस्सी टूटने से 51 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 1986 में उत्तरी भारत के हरिद्वार में भगदड़ से 50 लोगों की जान चली गई थी. 1954 में इलाहाबाद में मची भगदड़ अब तक की सबसे गंभीर घटना रही है जब 800 के आसपास लोगों की मौत हो गई थी. |
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