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भारत-चीन के बीच वार्ता की 'नई प्रक्रिया' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालीन और सामरिक रुप से महत्वपूर्ण बनाने के लिए भारत और चीन ने अपनी बातचीत की एक नई प्रक्रिया शुरु की. इस बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों ही मुद्दों को ध्यान में रखा जाएगा. दोनों देशों के बीच सोमवार को पहली बार आधिकारिक स्तर पर सामरिक वार्ता हुई. भारतीय विदेश विभाग के प्रवक्ता नवतेज सरना के अनुसार इस बातचीत में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत हुई. नवतेज सरना ने कहा, "इस नई पहल को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के बारे को एक दूरगामी, सामरिक साझेदारी के रुप में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम माना जा सकता है." उन्होंने कहा कि इसे चीनी प्रधानमंत्री वेन चियापाओ की आगामी भारत यात्रा की तैयारी के रुप में देखा जा सकता है. उल्लेखनीय है कि मार्च में चीन के प्रधानमंत्री वेन चियापाओ भारत आ रहे हैं. दोनों देशों के बीच इससे पहले सुरक्षा से जुड़े मसलों पर वार्ताएं होती रही हैं लेकिन कभी भी सामरिक वार्तांएँ नहीं हुई हैं. बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश सचिव श्याम सरन ने किया और चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई की विदेश उपमंत्री वू तावे ने. वार्ता के बाद हुई पत्रकारवार्ता में प्रवक्ता सरना ने बताया कि सोमवार को हुई वार्ता में सीमा के विवाद और चीन से पाकिस्तान को परमाणु जानकारी देने के भारत के आरोपों पर कोई बात नहीं हुई. |
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