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सूनामी चेतावनी प्रणाली लगाई जाएगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विज्ञान और तकनीक मंत्री ने घोषणा की है कि सूनामी की चेतावनी देने वाली प्रणाली दो से तीन साल के अंदर काम करना शुरू कर देगी. बंगलौर में एक सम्मेलन में विज्ञान मंत्री कपिल सिब्बल ने बताया कि दो करोड़ सत्तर लाख डॉलर की लागत से बन रही ये प्रणाली सूनामी की गति और खतरे वाले इलाक़ों की जानकारी देगी. इसके अलावा चेतावनी प्रणाली में डीप ओशन असेसमेंट रिपोर्टिंग तकनीक भी होगी, जिसे छह किलोमीटर की गहराई में लगाया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस प्रणाली को लगाने का फैसला रविवार को कैबिनेट की एक बैठक में लिया गया. सूनामी लहरों की चपेट में आकर भारत में क़रीब 10,000 लोग मारे गए हैं और 5,500 अभी भी लापता हैं. इनमें से अधिकांश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के हैं. उल्लेखनीय है कि 26 दिसंबर को भूकंप से अंडमान निकोबार तो तुरंत प्रभावित हो गया था, लेकिन सूनामी को भारत के प्रमुख इलाक़ों में पहुँचने में दो घंटे लगे थे. बचाव उधर नौसेना ने बुधवार को कहा कि वो बचाव कार्य जारी रखेगी, लेकिन ये माना कि अब और लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद नहीं के बराबर है. नौसेना अध्यक्ष एडमिरल अरूण प्रकाश कहते हैं, "समुद्र के हालात देखते हुए लगता नहीं है कि और शव भी बरामद किए जा सकेंगे. ऐसे में किसी के जिंदा मिलने की उम्मीद तो न के बराबर ही है." इलाक़े के कई द्वीपों का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा, "मैंने विनाश की बहुत खौफनाक तस्वीर देखी है. दूर-दूर तक सब कुछ तबाह हो गया है." फिलहाल राहतकर्मी बेघर हुए 40,000 लोगों को अप्रैल में मानसून के शुरू होने से पहले आसरा देने की कोशिश में लगे हैं. तमिलनाडु के नागपट्टनम ज़िले के एक सरकारी अधिकारी जे राधाकृष्णन ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया, " हमें यहाँ ऐसे लोगों की भीड़ नहीं चाहिए जो एक-दो दिन के लिए आएँ और इस जगह के चक्कर मारकर वापस चले जाऐं." उन्होंने कहा कि इन्फोसिस और टाटा जैसी कंपनियां मदद के लिए आगे आईं हैं. |
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