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उमा भारती की पार्टी में वापसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की विवादास्पद नेता उमा भारती को पार्टी में वापस ले लिया गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने दिल्ली में शुक्रवार को यह घोषणा की. उमा भारती को पिछले नवंबर माह में अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था. लेकिन अब उमा भारती को वापस पार्टी में ले लिया गया है. जानकारों का मानना है कि पार्टी ने बिहार, झारखंड और हरियाणा में होने वाले चुनावों के मद्देनज़र उमा को वापस लिया है. उमा चुनाव प्रचार में पार्टी के काम आ सकती है. हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि उमा को पार्टी में फिर से महासचिव बनाया जाएगा या नहीं. महाराष्ट्र में पार्टी की करारी हार के बाद लालकृष्ण आडवाणी को अध्यक्ष बनाया गया. लोकसभा चुनावों में ख़राब प्रदर्शन और महाराष्ट्र में हार के कारणों पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में उमा भारती ने आडवाणी के बयानों पर टोकाटाकी करनी शुरु कर दी. वो इस हद तक नाराज़ थीं कि मीडिया के सामने ही बैठक छोड़ कर चली गई. बात बढ़ी और उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. मामला जानकारों के अनुसार उमा भारती काफी पहले से ही पार्टी नेतृत्व से नाराज़ चल रही थीं. मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान जब उनके ख़िलाफ एक पुराने मामले में एफआईआर दर्ज़ हुई तो उन्हें पद छोड़ना पड़ा. उमा ने पद तो छोड़ दिया लेकिन बंगलौर तक तिरंगा यात्रा की. उन पर तनावपूर्ण माहौल में तिरंगा फहराने के संबंध में ही पुराना मामला भी दर्ज़ था. हालांकि पार्टी की ओर से उमा की तिरंगा यात्रा को बहुत तवज्ज़ो नहीं दी गई थी. बात यहीं ख़त्म नहीं हुई और जब नए अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी नई टीम की घोषणा की तो उसमें उमा का नाम नहीं था. बताया जाता है उमा भारती इससे बहुत आहत हुई. दबाव के बाद उमा महासचिव तो बन गई लेकिन कड़वाहट भुला न सकीं. अनुशासनात्मक मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक मे ही उमा ने पार्टी के शब्दों में अनुशासनहीनता की थी. |
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