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आख़िर कर्नाटक में मंत्रिमंडल का विस्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक के मुख्यमंत्री धरम सिंह ने आख़िर छह महीने बाद अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर लिया है. कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) की गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री धरम सिंह राजनीतिक खींचतान के चलते मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पा रहे थे. यह उनके मंत्रिमंडल का पहला विस्तार है. कुल दस मंत्रियों के साथ सरकार चला रहे कांग्रेस के मुख्यमंत्री के पास इन छह महीनों में 20 विभागों का प्रभार था. मंगलवार को किए गए मंत्रिमंडल विस्तार में 20 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है जिसमें 18 कैबिनेट मंत्री हैं और दो राज्यमंत्री हैं. बीस नए मंत्रियों में नौ कांग्रेस के हैं और 11 जनता दल (सेक्यूलर) के. अब मंत्रियों की कुल संख्या 32 हो गई है. खींचतान बीबीसी के दक्षिण भारत संवाददाता सुनील रामन का कहना है कि अभी भी मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल का विस्तार इसलिए किया है क्योंकि जनता दल (एस) ने धमकी दी थी कि वे 15 दिसंबर तक मंत्रिमंडल का विस्तार कर लें. 15 दिसंबर की तारीख़ इसलिए क्योंकि 16 दिसंबर से कर्नाटक में शून्य दिवस शुरु हो रहा है इस दौरान एक महीने वहाँ कोई नया काम या शुभ कार्य शुरु नहीं किया जाता. उनका कहना है कि राजनीतिक खींचतान के चलते ही धरम सिंह अपने मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पा रहे थे. एक ओर तो कांग्रेस के सभी बड़े नेता चाहते थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिले और अच्छा मंत्रालय भी. दूसरी ओर जनता दल (एस) के नेता गठबंधन पर दबाव डाल रहे थे कि उनके अधिकतम लोगों को मंत्री बनाया जाए. उनका तर्क था कि राज्य के निगमों में भी अब तक कांग्रेस के वही लोग हैं जो कांग्रेस के मुख्यमंत्री एसएस कृष्णा के कार्यकाल में नियुक्त किया गया था. बीबीसी संवाददाता के अनुसार धरम सिंह के बारे में माना जाता है कि वे जनता दल (एस) के नेता देवेगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी के वैसे विरोधी नहीं हैं जैसे कि एसएम कृष्णा हुआ करते थे. |
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