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मुआवज़े की राशि के भरोसे चमकता बाज़ार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दीवाली को बीते एक पखवाड़े से अधिक समय हो गया लेकिन भोपाल में दुकानें अभी भी सजी हुई हैं, बाजार में रौनक बरकरार है. अब जबकि देश के दूसरे हिस्सों के दुकानदार त्योहार के दौरान हुई कमाई का हिसाब किताब लगाने में व्यस्त हैं, भोपाल में जैसे यह काम शुरू ही हुआ है. और दुकानदार ही क्यों बिल्डर, बैंकर, बीमा एजेंट और क़रीब-क़रीब हर कोई इस त्योहार में अपना अपना हिस्सा पाने को बेताब है. अगले तीन महीने के दौरान भोपाल की अर्थव्यवस्था में 1567 करोड़ रुपये की आमद होने वाली है. यह उस रकम का आधा है, जिसे लालू प्रसाद यादव देश के एक पिछड़े राज्य बिहार के विकास के लिए केंद्र से मांग रहे हैं. गैस कांड से प्रभावित हर वार्ड के नागिरकों को 25 हज़ार रुपये मिलने वाले हैं. 1984 की गैस त्रासदी के एवज में मिलने वाले मुआवाजे की यह दूसरी किस्त है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक यह रकम पाँच लाख 76 हज़ार गैस पीड़ितों में बांटी जानी है. मुआवजा बांटे जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दिसंबर के मध्य तक चेक बंटने शुरू हो जाएंगे. हालांकि 20 करोड़ पहले ही बांटी चुकी है. इस काम में दिसंबर में तेजी आने की संभावना है जब हाईकोर्ट इस काम के लिए बनाए गए 14 विशेष न्यायालयों के लिए जज उपलब्ध कराएगा. खुशी और योजनाएँ 20 बरस पहले हुई गैस त्रासदी अधिकांश लोगों की स्मृति में धुंधली पड़ चुकी है और मुआवजा उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है. शहर में अब उत्सुकता है. जिस दिन मुआवज़ा बाँटने का फैसला सुनाया गया लोग शहर के चौराहों में इकटठे हो गए और खुशी से झूम उठे. लोग बता रहे हैं कि औसतन हर परिवार को एक लाख से तीन लाख रुपये मिल सकते हैं. यह परिवार के सदस्यों की संख्या पर निर्भर है. लोग अब मोटर साइकिल से लेकर टीवी खरीदने की योजनाएं बना रहे हैं. मसलन सुरेश पांचफूले अपने निर्माणाधीन मकान में संगरमर की टाइल्स लगाना चाहते हैं. एस.डी. शुक्ला ने पहले ही एक पुरानी मारुति एस्टीम कार खरीद ली है क्योंकि चार सदस्यों वाले उनके परिवार को एक लाख रुपये मिलने वाले हैं. कुछ लोग इस रकम से अपने कर्ज उतारना चाहते हैं. 38 बरस के पीसी बंधेवाल अपनी पत्नी के साथ बाजार में डीवीडी प्लेयर के माडल देख रहे हैं. ये दोनों सरकारी कर्मचारी हैं. बंधेवाल कहते हैं, “हमने बेटे के लिए बाइक खरीदने के लिए स्टेट बैंक से लोन ले रखा है. बैंक का कर्ज उतारने के बाद भी हमारे पास इतना पैसा बचेगा कि हम उससे बेहतरीन क्वालिटी का डीवीडी प्लेयर खरीद सकते हैं.” मजदूरी करने वाले बाबूलाल भी किसी से पीछे नहीं हैं. वह भी आईसीआईसीआई बैंक से मोटर साइकिल खरीदने के लिए लोन की बात कर रहे हैं. वह स्वयं और पत्नी के मुआवजे से संबंधित दस्तावेज बतौर गारंटी बैंक को देने को भी तैयार हैं. दुकानदारों की चाँदी
उन्हें उम्मीद है कि मांग और बढ़ेगी. मोटर साइकिल डीलर मध्य प्रदेश में ही खंडवा जिले के छोटे से कस्बे हरसूद का उदाहरण देते हैं. नर्मदा के पानी में डूबने वाले इस कस्बे के 26 हजार लोगों को मुआवजा मिलने के बाद यहां मोटर साइकिलों की मासिक बिक्री 200 से बढ़कर 1600 तक जा पहुंची थी. बजाज के अधिकृत डीलर भोपाल गैरेज एंड सर्विस स्टेशन के प्रबंधक एम. मैथ्यू कहते हैं, “संभावना है कि मुआवज़े की 30 फीसदी रकम दो पहिया वाहनों की खरीद में ही लगाई जाएगी.” उनका शो रूम पुराने शहर में है, जहां अधिकांश गैस पीड़ित रहते हैं. शहर के दूसरे डीलरों की तरह इस डीलर ने भी कंपनी को अतिरिक्त वाहन भेजने का अनुरोध कर रखा है. यही नहीं मैथ्यू को उम्मीद है कि इस बार खरीददार लोन के बजाय सीधे कैश में भुगतान करेंगे. हालांकि पर्सनल और वाहन लोन के काम से जुडे बजाज फाइनेंस के ब्रांच मैनेजर संजय पांडे इससे सहमत नहीं हैं. वह कहते हैं, “लोग पूरा रकम देकर मोटर साइकिल खरीदने के बजाय इसका इस्तेमाल लोन से कार खरीदने के लिए डाउन पेमेंट के रूप में करना चाहते हैं.“ दिसंबर के शुरू होते ही यह कंपनी कम ब्याज दर पर लोन की पेशकश कर सकती है. यही नहीं उसकी योजना में 10 फीसदी डाउन पेमेंट पर कार का लोन भी शामिल है. इलेक्ट्रानिक सामानों के कारोबार से जुड़े “हरिओम इलेक्ट्रानिक्स” ने पहले ही 'स्क्रैच एंड विन' जैसी योजना चला रखी है. इस दुकान के मालिक प्रकाश मंजानी कहते हैं, “ रेफ्रिजरेटर, म्यूजिक सिस्टम, वाशिंग मशीन जैसे हर सामानों की बिक्री पर यह 'स्क्रैच एंड विन' योजना शामिल है.” बैक भी पीछे नहीं बैंक और वित्तीय संस्थाएं भी गैस पीड़ितों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं. दरअसल गैस पीड़ितों को मुआवजा चेक के ज़रिये ही मिलना है.
ज़ाहिर है इसके लिए गैस पीड़ितों का किसी न किसी बैंक में खाता होना चाहिए. लिहाज़ा सार्वजिनक क्षेत्रों के बैंकों ने खाता खोलने के लिए रियायतों की बरसात कर दी है. पुराने शहर में स्टेट बैंक की ब्रांच के बाहर बैनर लगा है, “न शुरुआती जमा की ज़ररुत और न ही आवास प्रमाण पत्र की.” यानी खाता खोलने के लिए बस यही काफी है कि आवेदक गैस पीड़ित है. लेकिन, निजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बैंक ज़रा सतर्कता बरत रहे हैं.
एक शीर्ष निजी बैंक के रिजनल मैनेजर कहते हैं, “ हम अपने नियमों को नहीं बदल सकते.” उनका इशारा इस ओर है कि ज्यादातर मामलों में ये खाते थोड़े समय के लिए ही खोले जाने हैं. यानी 45 दिन की न्यूनतम सीमा के बाद लोग अपने पैसे निकाल लेंगे. आईसीआईसीआई बैंक ने दावा अदालतों के बाहर तंबू गाड़ रखे हैं और लोगों को बता रहे हैं कि तरह फिक्सड डिपाजिट पर बैंक की ब्याज दरें आकर्षक हैं. स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के पर्सनल फाइनेंशियल कंसलटेंट गौरव मेहता कहते हैं, हमारे सेल्स टीम ने काम शुरू कर दिया है. सेंचुरियन बैंक की नजर भी सेविंग एकाउंट के बजाय दीर्घकालीन जमा पर है. भवन निर्माता भी इस दौड़ में भवन निर्माता भी पीछे नहीं. भोपाल विकास प्राधिकरण हाथों हाथ फ्लैट जैसी नई स्कीम की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है. सहारा हाउसिंग ने गैस पीड़ितों के लिए प्रस्तावित सौ एकड़ के क्षेत्र में नई कालोनी विकसित करने का प्रस्ताव दे रखा है. इस कंपनी के सचिन मिश्रा कहते हैं, “हमने फाइनेंसरों के साथ इसी शर्त पर करार कर रखा है कि वह दो लाख रुपये तक के लोन के लिए आयकर दस्तावेज या फिर सेलरी स्लिप के लिए ज़ोर नहीं देंगे.” सरकारी मध्य प्रदेश आवास मंडल तो जैसे हर किसी के घर के सपने को पूरा करने को बेताब है. उसने पुराने शहर में 35 एकड़ जमीन ले रखी है, जहां एक हजार एलआईजी फ्लैट बनाए जाएंगे. आवास और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव सत्यप्रकाश कहते हैं, “हम चाहते हैं कि लोग पैसे को यूं ही उड़ाने के बजाय इसे निवेश करें. इसलिए हम लोगों को जागरुक कर रहे हैं.” |
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