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शंकराचार्य को अदालत लाने का आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण भारत के कांचीपुरम शहर के मजिस्ट्रेट ने कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को गुरूवार को अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं. मंगलवार को जयेंद्र सरस्वती की पुलिस हिरासत संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने कहा कि याचिका पर फ़ैसले से पहले से वो चाहेंगे कि शंकराचार्य अदालत में पेश हों. बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय में उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई होनी है. कांची के शंकराचार्य को पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया गया था. उन पर अपने ही मंदिर के एक कर्मचारी की हत्या में शामिल होने का आरोप है. गिरफ़्तारी के बाद उन्हें 26 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. मंगलवार को जयेंद्र सरस्वती के स्थान पर विजयेंद्र सरस्वती ने कांची के मठ का कामकाज संभाला लेकिन उन्होंने जयेंद्र सरस्वती की ज़मानत संबंधी बातों पर कुछ भी नहीं कहा और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने जेल में बंद शंकराचार्य जयेंद्र से मंगलवार को मुलाक़ात की. राज्य सरकार ने पहली बार ही शंकराचार्य से जेल में किसी को मिलने की अनुमति दी थी. मुलाक़ात के बाद जोशी ने संवाददाताओं से कहा कि पुलिस शंकराचार्य के साथ आम क़ैदियों जैसा बर्ताव कर रही है. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पुलिस से सहयोग करने को तैयार हैं इसलिए उन्हें रिहा किया जाना चाहिए. पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडिस ने भी शंकराचार्य से मुलाक़ात की और इस गिरफ़्तारी को मानवाधिकारों का उल्लंघन कहा है. कांचीपुरम शहर पर इस घटना का कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ा है. हालाँकि वहाँ भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. |
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