| भारत-श्रीलंका सहयोग बढ़ाने पर सहमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और श्रीलंका के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाए जाने पर सहमति हुई है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने दिल्ली में कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारत यात्रा पर आई श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारातुंगा के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक बातचीत हुई है. इस बैठक में मनमोहन सिंह को श्रीलंका में शांति प्रक्रिया की ताज़ा गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई. विदेश मंत्री नटवर सिंह ने भी राष्ट्रपति कुमारातुंगा से मुलाक़ात की है. नवतेज सरना ने कहा, “दोनों देशों के बीच मत्स्य पालन, रक्षा, विकास से जुड़ी परियोजनाओं, नौका सेवा, मुक्त व्यापार समझौता और श्रीलंका को दी जाने वाली आर्थिक सहायता समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई.” उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन करने के लिए भारत श्रीलंका की सराहना करता है. रक्षा सहयोग इस वर्ष संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद राष्ट्रपति कुमारातुंगा की ये पहली भारत यात्रा है. राष्ट्रपति कुमारातुंगा पाँच दिनों की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाक़ात कर रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के अलावा राष्ट्रपति कुमारातुंगा भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रस्तावित समझौते पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगी. इससे पहले दोनों देशों की पिछली सरकारों ने एक ऐसे ही रक्षा समझौते को मंज़ूरी दी थी और माना जा रहा है कि अधिकारी उस समझौते को अंतिम रूप देने में लगे हैं. तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई और श्रीलंका के दूसरे तमिल गुट ऐसे समझौते की आलोचना करते है. उनका मानना है कि इससे सैन्य शक्ति का झुकाव श्रीलंका की सेना की ओर हो जाएगा. |
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