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ताज मामले में बर्ख़ास्तगी की सिफ़ारिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश सरकार ने ताज कॉरिडोर मामले में राज्य के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पूर्व पर्यावरण सचिव आरके शर्मा को नौकरी से निकालने की सिफ़ारिश की है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव डीएस बग्गा की पेंशन और ग्रैच्युटी भी रोकने के आदेश दिए गए हैं. बग्गा परियोजना के शुरू होने के समय राज्य के मुख्य सचिव थे और अब रिटायर हो चुके हैं. ताज महल के आसपास करोड़ों रुपए की लागत से एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना पर उठे विवाद की विभागीय जाँच में इन दोनों अधिकारियों को दोषी पाया गया है. आर के शर्मा ताज कॉरिडोर योजना के शुरू होने के समय उत्तर प्रदेश के पर्यावरण विभाग के सचिव थे और उन्होंने ही इस परियोजना को पर्यावरण के नज़रिए से जाँचने के बाद मंज़ूरी दी थी. मायावती के शासनकाल में शुरू की गई ताज कॉरिडोर परियोजना पर पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के बाद इसका काम रोक दिया गया था. कार्रवाई आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि राज्य सरकार इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की सिफ़ारिश की है और इस बारे में राज्य सरकार की तरफ़ से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल किया जाएगा. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है.
विभागीय जाँच में पाया गया है कि राज्य के पूर्व पर्यावरण सचिव आरके शर्मा और मुख्य सचिव डीएस बग्गा को इस बात का दोषी पाया गया है कि उन्होंने इस विवादास्पद परियोजना को मंज़ूरी देने से पहले संबंधित केंद्रीय अधिकारियों से समुचित अनुमति नहीं ली. चूँकि ये दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) काडर के हैं इसलिए उनकी बर्ख़ास्तगी केंद्रीय सिविल सेवा प्राधिकरण, संघ लोक सेवा आयोग और राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बिना नहीं हो सकती. इस मामले में दो अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पीएल पूनिया और वीके गुप्ता के ख़िलाफ़ भी जाँच पड़ताल हो रही है. इससे पहले जुलाई महीने में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती को नोटिस जारी किया था. मायावती और इन अधिकारियों को इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से अग्रिम ज़मानत हासिल है जिसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी. आगरा में विभिन्न ऐतिहासिक इमारतों को आपस में जोड़ने के लिए एक बड़ा गलियारा बनाने का प्रस्ताव था और इन इमारतों में ताज महल और आगरे का क़िला भी शामिल थे. करोड़ों रुपए की इस परियोजना के तहत गलियारे में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने को भी मंज़ूरी दी गई थी जिस पर पर्यावरण प्रेमियों का कहना था कि इससे ताज महल की खूबसूरती पर बाज़ार की भीड़भाड़ हावी हो जाएगी. |
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