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मुख्यमंत्री विवाद पर दोबारा बातचीत शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दशहरे की छुट्टी मनाने के बाद कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के नेता महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही तकरार को सुलझाने के लिए दोबारा बातचीत शुरू कर रहे हैं. महाराष्ट्र चुनाव में एनसीपी ने 71 और कांग्रेस ने 69 सीटें जीती हैं और अब विवाद इस बात को लेकर है कि मुख्यमंत्री गठबंधन के दोनों घटकों में से किसका हो. इस बातचीत से पहले एनसीपी के वरिष्ठ देवी प्रसाद त्रिपाठी ने बातचीत के आगे न बढ़ पाने का कारण बताते हुए समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था, "हमने दो प्रस्ताव दिए थे जिन पर कांग्रेस सहमत नहीं हुई जबकि कांग्रेस की तरफ़ से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया."
288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में 71 सीटें जीतकर एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है जबकि कांग्रेस को 69 सीटें हासिल हुईं. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ उनका चुनाव पूर्व तालमेल हुआ था इसलिए उसके तीन विधायकों को भी कांग्रेस की ही सूची में गिनना चाहिए. दूसरी ओर, शरद पवार का कहना है कि 1999 के फार्मूले पर अमल होना चाहिए जिसके तहत मुख्यमंत्री अधिक विधायकों वाले दल से बनना चाहिए. 1999 के चुनाव में कांग्रेस ने अधिक सीटें जीती थीं और एनसीपी ने उप मुख्यमंत्री पद से संतोष कर लिया था जबकि कांग्रेस को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी. अब तक दोनों पार्टियों के बीच शीर्ष स्तर पर एक बार बातचीत हुई है जबकि कांग्रेस की ओर से अहमद पटेल और एनसीपी की ओर से प्रफुल्ल पटेल को वार्ताकार बनाया गया है जो कई बार बातचीत कर चुके हैं. |
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