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अरुणाचल प्रदेश में काँग्रेस को बहुमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में काँग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल कर लिया है. काँग्रेस ने 60 में से 34 सीटें जीतीं हैं. राज्य में काँग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक 13 अक्तूबर को होगी जिसमें नए मुख्यमंत्री का चुनाव किया जाएगा. मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सिर्फ़ नौ सीटें ही मिलीं हैं. जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 13 सीटें जीतीं हैं. काँग्रेस के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे. बीजेपी को चुनाव से पहले उस समय तगड़ा झटका लगा था जब मुख्यमंत्री गेगांग अपांग दल-बल के साथ बीजेपी छोड़कर काँग्रेस में शामिल हो गए थे. उसके बाद से ही यह तय माना जा रहा था कि काँग्रेस को बीजेपी के मुक़ाबले ज़्यादा सीटें मिलेंगी. वैसे अरुणाचल प्रदेश में दल-बदल की परंपरा रही है. इस कारण कभी बीजेपी को फ़ायदा होता है तो कभी काँग्रेस को. दल-बदल अरुणाचल प्रदेश में इन दोनों शीर्ष पार्टियों पर दल-बदल कराकर अपनी सरकार बनाने के आरोप लगे हैं. दरअसल इस राज्य में व्यक्तित्व और जनजातीय समर्थन ज़्यादा मायने रखता है न कि पार्टियाँ. इसी का उदाहरण हैं मुख्यमंत्री गेगांग अपांग. पाँच साल पहले अपांग ने काँग्रेस छोड़कर अपनी ख़ुद की पार्टी अरुणाचल काँग्रेस बनाया था. उसके बाद वे अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने फिर दामन थामा काँग्रेस का. अब बहस इस पर हो रही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. नवनिर्वाचित विधायकों में कुछ अपांग समर्थक हैं तो कुछ पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश काँग्रेस के अध्यक्ष मुकुट मिथि. जानकारों का कहना है कि अपांग समर्थकों को ज़्यादा टिकट मिले थे इस कारण वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे हैं. |
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