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महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में इस बात को लेकर मतभेद क़ायम है कि किस पार्टी का मुख्यमंत्री बनेगा. रविवार को एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलकर अपनी पार्टी का पक्ष सामने रखा. लेकिन सोनिया गाँधी और शरद पवार के बीच हुई मुलाक़ात के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के मामले में कोई फ़ैसला नहीं हो सका. फ़िलहाल यह तय हुआ है कि दोनों पार्टियों के नेता अहमद पटेल और प्रफ़ुल्ल पटेल बैठकर इस मामले पर बात करेंगे. दोनों के बीच रविवार को ही किसी समय बात होने की संभावना है. शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस के रवैया ठीक है, उन्होंने कहा,"हमारी पार्टी छोटी है और इसमें वैसी समस्याएँ नहीं हैं जैसी बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस के साथ हैं." दूसरी ओर मुंबई से बीबीसी संवाददाता जयश्री बजोरिया ने ख़बर दी है कि मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे के घर पर कांग्रेस नेताओं की सुबह से बैठक चल रही है. उनका कहना है कि इस बैठक में शिंदे के अलावा मारग्रेट अल्वा, दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के कुछ विधायकों के अलावा जीतने वाले बाग़ी नेता भी थे. दूसरी ओर एनसीपी के खेमे में रविवार को शांति है और सारा मामला दिल्ली में शरद पवार के निवास से ही तय हो रहा है. 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में काँग्रेस-एनसीपी और सहयोगी दलों ने 144 सीटें जीतीं हैं. हालाँकि बहुमत के लिए 145 सीटों की ज़रूरत है लेकिन यह तय माना जा रहा है कि गठबंधन आसानी से बहुमत जुटा लेगा. काँग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर तना-तनी उस समय शुरू हुई जब राज्य में कम सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने के बावजूद पवार की एनसीपी ने ज़्यादा सीटें जीती. जबकि कांग्रेस के खाते में कम ही सीटें आईं. इसके बाद से पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने ऐसे फ़ॉर्मूले की बात कहकर बहस को और तेज़ कर दिया कि जिसकी सीटें ज़्यादा हों उसी का मुख्यमंत्री बनना चाहिए. 'कांग्रेसी फ़ॉर्मूला' शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस ने ही पाँच साल पहले महाराष्ट्र में यह फ़ॉर्मूला पेश किया था. उन्होंने कहा कि हाल ही में कर्नाटक में इसी फ़ॉर्मूले को आधार बना कर कांग्रेस की सरकार वहाँ बनी है.
एनसीपी अध्यक्ष पर यह दबाव प्रदेश इकाई की ओर से भी है. क्योंकि पिछली बार इसी फ़ॉर्मूले के आधार पर कांग्रेस का मुख्यमंत्री बना था. लेकिन कांग्रेस की प्रदेश इकाई भी झुकने को तैयार नहीं और कई नेता खुल कर ये बयान दे चुके हैं कि कांग्रेस का ही मुख्यमंत्री होना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वामपंथी पार्टी के तीन विधायक और दो निर्दलीय उनके समर्थन से जीते हैं इसलिए उनके नेता को ही मुख्यमंत्री का पद मिलना चाहिए. ख़बर है कि अब कांग्रेस कह रही है कि जीती हुई सीटों की गिनती करते वक़्त उन सीटों की भी गिनती करनी चाहिए जो दोनों पार्टियों ने चुनावी गठबंधन के लिए अपनी सहयोगी पार्टियों को दी थीं. उदाहरण के तौर पर कांग्रेस ने वामपंथी दलों को अपने हिस्से की सीटें दी थीं जबकि एनसीपी ने आरपीआई को. कांग्रेस दावा कर रही है कि जीतने वालों में उनके विधायकों की संख्या 80 से ज़्यादा है जबकि एनसीपी का कहना है कि उनके विधायकों की संख्या ज़्यादा है.
दोनों ही पार्टियाँ जीते हुए बाग़ियों और निर्दलियों के आधार पर अपने विधायकों की संख्या ज़्यादा बता रही हैं. महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से राष्ट्रवादी कांग्रेस को 71 और कांग्रेस को 69 सीटें मिलीं हैं. वामपंथी दलों को तीन और आरपीआई को एक सीट मिली है. भारतीय जनता पार्टी को 54 और शिवसेना ने 62 सीटें जीतीं हैं. |
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