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कैसा है पाकिस्तानी सेना का ढाँचा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में भी राष्ट्रपति ही तीनों सेनाओं थल सेना, वायु सेना और नौ सेना का प्रमुख होता है. वैसे तीनों सेनाओं के प्रमुखों के ऊपर भी एक कमेटी होती है ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कमेटी. इसका चेयरमैन कहने को तो इन तीनों सेनाध्यक्षों के ऊपर होता है लेकिन उसके पास अधिकार के नाम पर ज़्यादा कुछ नहीं होता. तीनों सेनाध्यक्षों में सबसे ज़्यादा प्रभावी और शक्तिशाली होता है चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टॉफ़ यानी थल सेनाध्यक्ष. इस समय परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति के साथ-साथ इस पद पर भी बने हैं. यानी वे सेनाध्यक्ष और राष्ट्रपति दोनों है इस तरह उनके ऊपर कोई नहीं. सेनाध्यक्ष का पद पाकिस्तान के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण कहा जाता है क्योंकि अब तक वहाँ जितने भी विद्रोह हुए हैं वो यहीं से निकले हैं. सैनिक कमान अमरीका की तर्ज़ पर तैयार किए गए सैनिक कमान में थल सेना उपाध्यक्ष की भी व्यवस्था पाकिस्तान की सेना में है.
वैसे यह पद पाकिस्तान में जनरल ज़िया उल हक़ के शासन में बना था क्योंकि राष्ट्रपति होने के कारण उनका काम बढ़ गया था. लेकिन अमरीका में ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टॉफ़ का चेयरमैन पाकिस्तान की तरह दिखावटी पद नहीं. वह वाकई सेनाओं का प्रमुख होता है. प्रभावी और शक्तिशाली भी. ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ में आते हैं चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, थल सेनाध्यक्ष, वायु सेनाध्यक्ष, नौ सेनाध्यक्ष और मरीन कमांडर. इस समय अमरीका में ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टॉफ़ के चेयरमैन का पद संभाल रहे हैं जनरल रिचर्ड मायर्स. अमरीका में ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ का चेयरमैन देश के राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का प्रमुख सुरक्षा सलाहकार भी होता है. |
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