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'अल-क़ायदा की साज़िश नाकाम की गई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि उसने अल क़ायदा के संदिग्ध सदस्यों की एक साज़िश को नाकाम कर दिया है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने बीबीसी को दिये एक इंटरव्यू में कहा, "ये लोग राजधानी इस्लामाबाद और उसके जुड़वां शहर रावलपिंडी में अमरीकी दूतावास, राष्ट्रपति निवास, प्रधानमंत्री निवास और सेना मुख्यालय के ऑडिटोरियम जैसे प्रमुख ठिकानों पर हमलों की योजना बना रहे थे." शेख़ रशीद ने ये भी बताया कि इन्होंने सारा बंदोबस्त कर लिया था, अपने लोगों को सही जगहों पर पहुंचा दिया था, उनकी ज़िम्मेदारियां तय कर दी थीं और उन्हे असला भी दे दिया था. जब सूचना मंत्री से ये पूछा गया कि इस साज़िश के पीछे किसका हाथ नज़र आता है तो उन्होने बताया कि दो मिस्री लोगों पर सरकार को शक है और वह उन्हे ढ़ूंढ रही है. शेख़ रशीद का कहना था कि ये चरमपन्थी दो गिरोहों में बटे हुए थे और अलग-अलग जगहों से कुल चार-पाँच लोग ही पकड़े गए. बाक़ी की तलाश जारी है. ये गिरफ्तारियां ग्यारह से पंद्रह अगस्त के बीच हुईं. विस्फोटक और हथियार शेख़ रशीद से जब ये पूछा गया कि सरकार को इस बात का शक क्योंकर हुआ कि ये लोग इतने व्यापक हमलों की तैयारी कर रहे थे तो उन्होने कहा कि उनके पास से पचास बमों के डैटोनेटर मिले, रॉकेट, रॉकेट लॉंचर्स, कैलैश्निकोफ़ राइफ़िलें और भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ मिले हैं. पाकिस्तान के सूचना मंत्री का कहना था कि ये लोग आज़ादी के हफ़्ते के दौरान ख़ून से खेलना चाहते थे, मासूम लोगों की जान लेना चाहते थे. पाकिस्तान का कहना है कि पिछले कुछ हफ़्तों में साठ से भी ज़्यादा चरमपन्थी पकड़े जा चुके हैं. पिछले महीने अल क़ायदा के एक कम्यूटर विशेषज्ञ मोहम्मद नईम नूर ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद से संदिग्ध चरमपन्थियों की पकड़-धकड़ में तेज़ी आई है. |
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