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नेपाल में विद्रोहियों से बातचीत की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने लगातार दूसरे दिन राजधानी काठमांडू में अवरोध जारी रखा है. उधर संकट को सुलझाने के लिए नेपाल सरकार माओवादियों से बातचीत करने को तैयार है. माओवादियों के अवरोध के कारण काठमांडू में भोजन और अन्य चीज़ें नहीं पहुँच पा रही हैं. मगर गुरूवार को वहाँ बाज़ार में ख़रीदारी सामान्य रही और कोई अफ़रा-तफ़री नहीं देखी गई. न तो हम माओवादियों को ख़त्म कर सकते हैं न ही वे हमारे दफ़्तर पर क़ब्ज़ा कर सकते हैं, दोनों को मिल-जुलकर रहना होगा नेपाली उपप्रधानमंत्री लेकिन ऐसी आशंका है कि अगर ये अवरोध और कुछ दिन जारी रहा तो खाने के सामान, तेल और पेट्रोल-गैस की कमी होनी शुरू हो जाएगी. काठमांडू को देश के बाक़ी हिस्सों से दो सड़कें जोड़ती हैं और विद्रोहियों के हमले के भय से इन पर वाहनों का आना-जाना बिल्कुल रूका हुआ है. माओवादी ये माँग कर रहे हैं कि जेलों में बंद उनके साथियों को रिहा किया जाए और मारे गए साथियों के बारे में जाँच करवाई जाए. नेपाल सरकार का कहना है कि वे बातचीत कर इस संकट को सुलझाना चाहते हैं. नेपाल के उपप्रधानमंत्री भरत मोहन अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा,"न तो हम माओवादियों को ख़त्म कर सकते हैं न ही वे हमारे दफ़्तर पर क़ब्ज़ा कर सकते हैं. दोनों को मिल-जुलकर रहना होगा". उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार माओवादियों से बिना शर्त बातचीत करने के लिए तैयार है. |
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