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शनिवार, 07 अगस्त, 2004 को 20:33 GMT तक के समाचार
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दिल के मरीज़ बच्चों का प्रदर्शन

दिल के मरीज़ बच्चों का हैदराबाद में प्रदर्शन
प्रदर्शन में अभिभावकों ने भी भाग लिया
भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में ग़रीब परिवारों के लगभग 300 ऐसे बच्चों ने सरकार से मुफ़्त इलाज की मांग करते हुए शनिवार को प्रदर्शन किया जो दिल के मरीज़ हैं.

लेकिन मौत से बचने की इस जद्दोजहद के दौरान प्रदर्शन स्थल पर ही एक बच्चे की मौत हो गई.

हैदराबाद के एक व्यस्त इलाक़े में महाजन संघर्ष समिति की ओर से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण मदिग ने किया था.

इन ग़रीब बच्चों के मुफ़्त इलाज की मांग को लेकर सरकार पर दबाव डालने के मक़सद से देश भर से लगभग 300 दिल के मरीज़ बच्चों और उनके अभिभावों को इकट्ठा किया गया था.

लेकिन करीमनगर से आए 14 साल के शोभन बाबू की मौत विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही दिल का दौरा पड़ने से गई जिससे प्रदर्शन स्थल पर तनाव बढ़ गया.

ये ख़बर जंगल की आग की तरह फैली और कुछ विपक्षी नेता इस हादसे की भनक लगते ही विरोध अभियान में शामिल होने के लिए घटनास्थल पर जा पहुँचे.

इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता बंडारू दत्तात्रेय, तेलुगु देशम के नेता और सांसद एस एम लाल जन बाशा तथा भाजपा विधायक जी कृष्णारेड्डी शामिल थे.

शोभन बाबू की लाश को क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों ने वहीं फुटपाथ पर रख कर धरना देना शुरु कर दिया. सरकारी अधिकारियों ने जब शव को अस्पताल पहुँचाना चाहा तो उन्हें वहाँ से भाग जाने को मजबूर कर दिया.

ग़ुस्सा

स्थिति को क़ाबू में करने के लिए राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव भाले राव कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आनन फ़ानन में वहाँ पहुंचे.

बीमार बच्चों को सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुँचाने के लिए अधिकारियों ने 30 एंबुलैंस गाड़ियों का भी इंतज़ाम किया था लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनका रास्ता रोक दिया.

बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप करके शोभन बाबू के शव को अस्पताल पहुँचाया और गंभीर रूप से बीमार 50 अन्य बच्चों को भी इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया.

मृतक शोभन बाबू के पिता टी रमेश ने फूट-फूट कर रोते हुए बताया कि वे तो यह ख़बर सुनकर हैदराबाद आए थे कि वहाँ दिल के मरीज़ बच्चे और उनके अभिभावक इकट्ठा हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस ख़बर को सुनकर उनके मन में उम्मीद की एक किरण जागी थी कि उनके बेटे को शायद नई ज़िंदगी मिल जाए लेकिन उसे तो बेवक़्त की मौत मिल गई.

अपने बीमार बच्चों के साथ आए कुछ और प्रदर्शनकारियों का भी ये कहना था कि इस विरोध अभियान के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी बल्कि वे तो यह सुनकर आए थे कि उनके बच्चों का मुफ़्त इलाज किया जाएगा.

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