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बुधवार, 04 अगस्त, 2004 को 19:11 GMT तक के समाचार
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एक और केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ वारंट

चंद्रशेखर राव
चंद्रशेखर राव केंद्र में मंत्री हैं लेकिन उनके पास कोई विभाग नहीं है
आंध्र प्रदेश की एक अदालत ने तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता तथा केंद्रीय मंत्री के. चंद्रशेखर राव के ख़िलाफ़ एक धोखाधड़ी के मामले में ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया है.

कोर्ट ने गैर जमानती वारंट आज तब जारी किया जब वे कोर्ट के सम्मन जारी करने के बाद भी अदालत में हाजिर न हो सके.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने गैर जमानती वारंट तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता और वकील एम प्रह्लाद गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया था.

लेकिन सम्मन का समय बीत जाने के बाद मंत्री के अदालत में उपस्थित न होने के कारण उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया.

चंद्रशेखर राव को मनमोहन सिंह की कैबिनेट में जहाजरानी मंत्री बनाया गया था लेकिन उन्होंने डीएमके और कांग्रेस के बीच हुए टकराव को टालने के लिए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

सरकार गठन के बाद डीएमके ने जहाजरानी मंत्रालय की माँग रखी थी, चंद्रशेखर राव इस्तीफ़े देने के बाद से केंद्रीय मंत्री तो हैं लेकिन उनके पास कोई मंत्रालय नहीं है.

गंभीर आरोप

प्रह्लाद ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया कि श्री राव तेलंगाना राष्ट्र पार्टी के राज्य विधानसभा के चुनाव में 778 लोगों से 7.8 लाख रुपये टिकट दिलवाने के नाम पर वसूले थे.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट के लिए दस हज़ार रूपए राव को दिए थे.

वे बताते हैं कि न तो उन्हें पार्टी का टिकट ही दिया गया और न हीं पार्टी अध्यक्ष ने उनके पैसे ही लौटाए.

वे कहते हैं कि राव ने इस पैसे को पार्टी फंड में न तो जमा ही किया और न ही कहीं इसे दिखाया.

प्रह्लाद का आरोप है कि राव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सभी 107 सीटों पर टिकट दिलाने का वादा किया था लेकिन राज्य में कांग्रेस पार्टी से गठबंधन हो जाने के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति को मात्र 42 सीटें ही मिल पाईं.

इस केस को अदालत ने भारतीय दंड कानून धारा 409, 419 तथा 420 के तहत सुनवाई के लिए 10 मई को दर्ज कर लिया.

चंद्रशेखर राव सोनिया गाँधी के साथ
चंद्रशेखर राव (सबसे दाएँ) को मनमोहन मंत्रिमंडल में जहाजरानी मंत्रालय दिया गया था

अदालत ने राव के खिलाफ सम्मन जारी करते हुए उन्हें अदालत में हाज़िर होने के लिए 26 जून से अब तक का समय दिया था.

राव की पार्टी के सूत्रों का कहना है कि मंत्री के खिलाफ जारी किए गए इस गैर जमानती वारंट को रद्द करने के लिए उसी कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

कठिन समय

राव ऐसे समय में इस नई मुसीबत में घिर गए हैं जबकि पहले ही अन्य मुद्दों पर उनकी तीख़ी आलोचना हो रही है.

दूसरी तरफ पीपुल्स वार ग्रुप भी अपनी बंदूक उनकी ओर ताने खड़ा है. वार ग्रुप का कहना है कि राव ने सरकार में शामिल होने के लिए तेलंगाना की जनता के हितों और अलग राज्य की माँग को ताक पर रख दिया.

सरकार के साथ बातचीत करने के लिए नियुक्त पीपुल्स वार ग्रुप के दूत वारा वारा राव का आरोप है कि चंद्रशेखर राव ने आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में समाचार माध्यमों को तेलंगाना मामले पर चुप रहने के लिए पैसे दिए.

दूसरी ओर, इन आरोपों से नाराज चंद्रशेखर राव ने पीपुल्स वार ग्रुप के दूत को चुनौती दी है कि यदि आरोपों को सच साबित कर दें तो वे आँध्र प्रदेश विधानसभा के पास स्थित तेलंगाना शहीद स्मारक के सामने आत्महत्या कर लेगें.

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