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मनोकामना पूरी, डीएमके की नाराज़गी दूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तीन दिन पुरानी मनमोहन सरकार में मंत्रिमंडल के बँटवारे को लेकर शुरू हुए विवाद का अंत काफ़ी दिलचस्प तरीक़े से हुआ है. जहाजरानी मंत्री चंद्रशेखर राव ने सोमवार की रात सोनिया गाँधी से मुलाक़ात करके कहा कि वे अपना पद छोड़ने को तैयार हैं ताकि डीएमके की इस मंत्रालय की माँग को पूरा किया जा सके. मंत्रिमंडल में डीएमके के सात मंत्री थे जिन्होंने कुछ ख़ास मंत्रालय नहीं मिलने पर अपना काम संभालने से इनकार कर दिया था जिसके बाद दो दिनों से मान-मनोव्वल का सिलसिला चल रहा था. तेलंगाना राष्ट्र समिति के चंद्रशेखर राव ने कहा कि "यह सबके हित में है कि सरकार चले और अच्छी तरह से चले इसलिए मैं जहाजरानी विभाग छोड़ने की इच्छा ज़ाहिर की."
चंद्रशेखर राव ने कहा, "सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री का पद छोड़कर राजनीति करने वाले हर व्यक्ति के सामने आदर्श स्थापित किया है कि लोग पद के लोभ से ऊपर उठकर काम करें." चंद्रशेखर राव मंत्री तो हैं लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा. इसके बाद संचार मंत्री बनाए गए दयानिधि मारन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "सारे विवाद सुलझ गए हैं, कांग्रेस ने वे मंत्रालय हमें दे दिए हैं जिनका वादा किया गया था." प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति को एक पत्र भेजकर सूचित किया है कि टीआर बालू को भूतल परिवहन मंत्रालय के अलावा जहाजरानी मंत्रालय भी दे दिया जाएगा. साथ ही, वित्त राज्य मंत्री का कार्यभार भी डीएमके के एसएस पलानीमाणिकम को सौंपा जा रहा है. एम करूणानिधि की पार्टी डीएमके के सोलह सांसद हैं और उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सात कुर्सियाँ मिली हैं. |
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