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छत्तीसगढ़ के 'फ़रार' नेताओं ने ज़मानत ली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे और गृहमंत्री बृजमोहन अग्रवाल दोनों ने अदालत जाकर ज़मानत ले ली है. दोनों के ही ख़िलाफ़ पुराने मामलों में दो अलग अलग अदालतों ने गिरफ़्तारी वारंट जारी कर रखे थे और दोनों ही पुलिस रिकॉर्ड में 'फ़रार' थे. राज्य में नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा ने पिछले दिनों इन मामलों को लेकर सामने आए थे इसके बाद से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी. विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे का मामला तो शुक्रवार को ही सामने आया था. 1982 में मारपीट के किसी मामले में उनके ख़िलाफ़ 1989 से कई बार गिरफ़्तारी वारंट जारी किया जा चुका था. आख़िरी बार इसी महीने की 19 तारीख़ को उनकी गिरफ़्तारी का वारंट जारी हुआ था. हालांकि उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है लेकिन शनिवार की सुबह उन्होंने दुर्ग की ज़िला अदालत में उपस्थित होकर ज़मानत की अर्ज़ी दी जिसे मंज़ूर कर लिया गया. गृहमंत्री ने भी ज़मानत ली इसी तरह गृहमंत्री बृजमोहन अग्रवाल का मामला बुधवार को सामने आया था.
महेंद्र कर्मा ने आरोप लगाया था कि गृहमंत्री बृजमोहन अग्रवाल के ख़िलाफ़ कई बार गिरफ़्तारी वारंट जारी हो चुका है और आख़िरी बार 19 मार्च 2004 को वारंट जारी हुआ था. उन पर आरोप था कि विधायक के रुप में उन्होंने अपने भाई को पुलिस हिरासत से छुड़वाकर भागने में मदद की थी. गृहमंत्री अग्रवाल ने भी कहा था कि उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है और उनके मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पुलिस विभाग के कई आलाअफ़सरों ने भी कहा था कि उनकी जानकारी के अनुसार इस मामले में कोई वारंट नहीं है. लेकिन शनिवार की सुबह बृजमोहन अग्रवाल भी रायपुर की ज़िला अदालत में उपस्थित हुए और ज़मानत ली. उधर कांग्रेस ने इन दोनों मामलों को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है. वे गृहमंत्री अग्रवाल का तो इस्तीफ़ा मांग रहे हैं जबकि विधानसभा अध्यक्ष पांडे के मामले में उन्होंने कहा था कि वे अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए क़दम उठाएँ. दोनों ने नेताओं ने इस्तीफ़ा देने से इंकार किया था. |
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