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बीजेपी और शिवसेना पर जुर्माना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई उच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल शिवसेना पर एक साल पहले हड़ताल के दौरान हुए नुक़सान की भरपाई के लिए बीस-बीस लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. पिछले साल 30 जुलाई को मुंबई में हुए बम धमाके के बाद दोनो पार्टियों ने मुंबई बंद का आहवान किया था. उच्च न्यायालय के दो सदस्यों की खंडपीठ ने फ़ैसला सुनाया कि ये मुआवज़े की रक़म एक कोष में जमा होगी जो नगरिक सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होगा. मुंबई निवासियों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. मुंबई निवासियों का मानना है कि हड़तालों से सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त होता है और ये देश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले मुंबई शहर में जन-जीवन ठप्प कर देती हैं. लेकिन भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का कहना था कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को हड़ताल का आहवान करने का अधिकार होता है. इसलिए ये दल इस फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे. ये याचिका मुंबई के कुछ प्रमुख निवासियों ने दायर की थी और उन्होंने दावा किया था कि हड़ताल से शहर के व्यवसायों को पाँच करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ था. |
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