| भारत में लाखों कर्मचारी हड़ताल पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में वामपंथी दलों से जुड़े कर्मचारी संगठनों के आहवान पर बैंक, बीमा कंपनियों, निजी और सरकारी संस्थाओं के लाखों कर्मचारी हड़ताल पर हैं. ये एक दिन की हड़ताल, सर्वोच्च न्यायालय के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ बुलाई गई है जिसके अनुसार सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने का कोई अधिकार नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला पिछले साल अगस्त में तमिलनाडु में हड़ताली कर्मचारियों की बहाली से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के समय आया था. अदालत ने कहा था कि कर्मचारी संगठनों को अपनी माँगें मनवाने के लिए सामूहिक रुप से चर्चा करने का क़ानूनी अधिकार तो है पर वे हड़ताल नहीं कर सकते. मंगलवार की हड़ताल में कर्मचारी सरकार की निजीकरण की नीतियों का भी विरोध कर रहे हैं. इस हड़ताल से पश्चिम बंगाल में जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वहाँ रेल, बस और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है. मुंबई में बहुत सारे आर्थिक संस्थान बंद पड़े हैं. समाचार एजेंसियों के अनुसार बंगलौर में कई सरकारी संस्थानों पर भी हड़ताल का असर पड़ा है. महत्वपूर्ण है कि काँग्रेस समर्थित इनटक और भाजपा समर्थित भारतीय मज़दूर संघ इस हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. |
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