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शनिवार, 20 दिसंबर, 2003 को 12:46 GMT तक के समाचार
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असम में हड़ताल का मिला-जुला असर

भूटान ने विद्रोही
भूटान ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की है

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में पृथकतावादी संगठनों ने दो दिन की हड़ताल आयोजित की थी, उसका मिला-जुला असर हुआ है.

असम के पृथकतावादियों के ख़िलाफ़ भूटान सरकार ने हाल ही में कड़ी कार्रवाई शुरू की है जिसके तहत उन्हें वहाँ से बाहर निकाल दिया गया है.

ये पृथकतावादी माँग कर रहे हैं कि इस कार्रवाई में उनके जो साथी मारे गए हैं उनके शव असम और उत्तरी बंगाल में उनके परिवारों को सौंप दिए जाने चाहिए.

पृथकतावादियों ने धमकी दी है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो हड़ताल जारी रहेगी.

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम यानी उल्फ़ा, नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी) और कामतापुर लिबरेशन ओर्गनाइज़ेशन (केएलओ) ने शनिवार से दो दिन की हड़ताल का आहवान किया था.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हड़ताल का वैसे तो ज़्यादा असर नहीं हुआ है लेकिन नलबाड़ी, नगाँव, तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ ज़िलों में जनजीवन प्रभावित हुआ.

लंबी दूरी तक चलने वाली बसों के साथ विशेष सुरक्षा दस्ते चलते देख गए और पुलिस ने रेल पटरी के आसपास चौकसी बढ़ा दी है.

शहरों में निजी वाहन भी रोज़ाना से कम संख्या में चले लेकिन रेल और हवाई यातायात सेवाएं सामान्य रहीं.

कुछ ज़िलों में दुकानें बंद रहीं और शैक्षिक संस्थानों में छात्रों की हाज़िरी कम रही.

चाय बागानों और उद्योगों में कामकाज सामान्य रहा.

माँग और असर

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उत्तरी बंगाल में हड़ताल का कोई असर नहीं देखा गया.

उल्फ़ा संगठन असम की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ रहा है जबकि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड बोडो जनजाति के लोगों के लिए एक स्वतंत्र बोडोलैंड राज्य की माँग कर रहा है.

कामतापुर लिबरेशन ओर्गनाइज़ेशन उत्तरी बंगाल के रोजबोंगशी जनजाति के लोगों के लिए एक अलग राज्य बनाने की माँग कर रहा है.

भूटान सरकार ने इस सप्ताह सोमवार से उनके ख़िलाफ़ जो कार्रवाई शुरू की है उसमें इन तीनों संगठनों के एक सौ से ज़्यादा कार्यकर्ता मारे गए हैं.

इन तीनों संगठनों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि अगर उनके साथियों के शव अगले चौबीस घंटों के भीतर उनके परिवारों को नहीं सौंपे गए तो हड़ताल अनिश्चितकाल के लिए जारी रह सकती है.

पड़ोसी राज्य त्रिपुरा के दो विद्रोही संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है.

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