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भारतीय विद्रोहियों की पेशकश
भूटान में अड्डा बनाए और उनके सैनिकों के साथ संघर्ष में लगे भारतीय विद्रोहियों ने कहा है कि अगर उनके विरुद्ध सैन्य कार्रवाई रोक दी जाए तो वे अड्डे छोड़ने के लिए तैयार हैं. भूटानी सैनिकों ने पिछले कुछ दिनों में देश के दक्षिणी हिस्सों में बने कुछ विद्रोही ठिकानों पर धावा बोला है और तीन वरिष्ठ अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार भी कर लिया है. एक अनुमान के अनुसार इस संघर्ष में लगभग 70 फ़ीसदी अलगाववादी मारे गए हैं. भूटान ने विद्रोहियों के विरुद्ध पहली बार कोई कार्रवाई की है. ये सैनिक अपने देश के लगभग 30 ठिकानों से काम संचालित कर रहे 3000 भारतीय विद्रोहियों को निकालने की कोशिश में हैं. यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फ़ा, नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड और कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन ने भूटान से अड्डे हटा लेने की पेशकश की है. जान बचाने की अपील अल्फ़ा ने रेड-क्रॉस से अपील की है कि वह मामले में हस्तक्षेप करे जिससे विद्रोहियों के परिवारों की महिलाओं और बच्चों का जीवन बचाया जा सके. विद्रोहियों के अनुसार इस संघर्ष में 39 पुरुषों की जान गई है और अन्य 50 सदस्य घायल हुए हैं. इस संघर्ष में कम से कम 33 भूटानी सैनिक मारे भी गए हैं. कोलकाता में बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार भूटान ने जित तीन विद्रोही नेताओं को गिरफ़्तार किया है उन्हें वह भारत को सौंप देगा. इस बीच स्थानीय संवाददाताओं के अनुसार भारतीय सेना के हेलिकॉप्टर घायल भूटानी सैनिकों को भारतीय अस्पतालों में पहुँचा रहे हैं. भूटानी सेना अधिकारी के अनुसार विद्रोहियों ने काफ़ी नुक़सान उठाने के बाद अपनी रणनीति बदली है. |
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