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भारतीय विद्रोहियों के विरुद्ध कार्रवाई
भूटान का कहना है कि उसने भारतीय विद्रोहियों को खदेड़ने की प्रक्रिया शुरू की है. उसके अनुसार देश में बने अड्डों से विद्रोहियों को हटाने में उसके सात सैनिकों की जान गई है. एक सरकारी प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि ज़बरदस्त संघर्ष के बाद यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम के विद्रोही मुख्य अड्डा छोड़कर चले गए हैं. इधर विद्रोहियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए लगातार दबाव बना रहे भारत ने भी सीमा पूरी तरह सील कर दी है जिससे विद्रोही सीमा पार न कर सकें. भूटान ने अल्फ़ा और एक अन्य संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड यानी एनडीएफ़बी के विरुद्ध पहली बार शासन चलाया है. ये संगठन उसकी ज़मीन से कार्रवाई करते रहे हैं. अल्फ़ा और एनडीएफ़बी ने जब से हथियार उठाए हैं तब से हज़ारों लोगों की जान गई है. अल्फ़ा असम को भारत से स्वतंत्र कराना चाहता है जबकि एनडीएफ़बी पूर्वोत्तर भारत की एक जनजाति बोडो के लिए स्वतंत्र देश चाहता है. ज़बरदस्त संघर्ष विद्रोहियों ने बीबीसी को बताया कि सोमवार से ज़बरदस्त संघर्ष चल रहा है. एनडीएफ़बी के प्रवक्ता बी एराकाडो ने किसी अज्ञात स्थान से बताया कि दो ठिकानों से तो हमने भूटानी सेना को खदेड़ दिया है और एक ठिकाने से विद्रोहियों को पीछे हटना पड़ा है. वहीं अल्फ़ा के सैनिक कमांडर परेश बरुआ ने बीबीसी को बताया कि दक्षिणी भूटान के दो ठिकानों पर ज़बरदस्त हमले हुए हैं. उन्होंने बताया कि एक वरिष्ठ नेता भीमकाँटा बुरागोहाईं घायल हुए हैं. भूटानी अधिकारियों का कहना है कि हमला तब किया गया जब उन्हें शांतिपूर्वक तरीक़े से हटाने के सारे प्रयास विफल हो गए. भारतीय दबाव भारतीय सैनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने भूटान से लगने वाली सीमा पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है. मगर उनके अनुसार उन्होंने सैनिक कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है. विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने संसद को बताया, "सेना भूटान से भारत में आतंकवादियों को आने से रोकने के लिए ज़रूरी क़दम उठा रही है." भूटान की नेशनल एसेंबली ने विद्रोहियों के विरुद्ध सैनिक कार्रवाई शुरू करने का अधिकार सेना को दिया है. |
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