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सोमवार, 19 जुलाई, 2004 को 08:45 GMT तक के समाचार
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बातचीत की कामयाबी के लिए पूरे प्रयास

ख़ुर्शीद कसूरी और नटवर सिंह
ख़ुर्शीद कसूरी और नटवर सिंह की इससे पहले भी दो बार मुलाक़ात हो चुकी है
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए बातचीत को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे.

नटवर सिंह सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए सोमवार को इस्लामाबाद पहुँचे हैं.

नटवर सिंह 16 वर्ष बाद पाकिस्तान का दौरा कर रहे हैं. इसके पहले वे 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ पाकिस्तान गए थे.

भारत में नई सरकार आने के बाद से पहली बार कोई मंत्री पाकिस्तान गया था और इसलिए इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नटवर सिंह इस सम्मेलन में भाग लेने के अलावा वे पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी से अलग से बातचीत करेंगे.

इस्लामाबाद पहुँचने पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जारी शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी.

नटवर सिंह ने कहा, "हम दोनों देशों के बीच बातचीत को सफल बनाने के लिए हरसंभव क़दम उठाएँगे."

 हम दोनों देशों के बीच बातचीत को सफल बनाने के लिए हरसंभव क़दम उठाएँगे
नटवर सिंह

इससे पहले सोमवार को दोनों देशों के विदेश विभाग के उच्चाधिकारियों की मुलाक़ात हुई और भारतीय विदेश सचिव शशांक और पाकिस्तानी विदेश सचिव रियाज़ खोखर ने भी चर्चा की.

चर्चा के विषय

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क के विदेश मंत्रियों की दो दिन का सम्मेलन मंगलवार से शुरू हो रहा है.

सार्क विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में इस वर्ष जनवरी में इस्लामाबाद में हुए सार्क शिखर सम्मेलन में पारित किए गए प्रस्तावों को अमल में लाने के लिए किए गए प्रयासों की समीक्षा की जाएगी.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मसूद ख़ान ने कहा है कि ग़रीबी मिटाने से संबंधित कार्यक्रम, पर्यावरण, संचार और ऊर्जा जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी.

इसके अलावा मुक़्त व्यापार संगठन बनाने की दिशा में आवश्यक क़दम उठाने पर भी बल दिया जाएगा.

पाकिस्तान चाहता था कि बैठक में शांति और सुरक्षा पर भी चर्चा की जाए मगर भारत ने इसका विरोध किया.

सकारात्मक माहौल

 अभी तक दोनों ही देशों ने सार्क को कोई ख़ास महत्व नहीं दिया है. पाकिस्तान समझता है कि सार्क के मज़बूत होने से भारत की इस क्षेत्र में पैठ बढ़ेगी जब कि भारत को डर है कि शायद उसके छोटा पड़ोसी ज़्यादा रियायतों के लिए इकट्ठा होकर उसपर अनुचित दबाव डालेंगे
एस डी मुनि

दक्षिण एशियाई मामलों के जानकारों का कहना है कि इस बार ये सम्मेलन बड़े सकारात्मक माहौल में हो रहा है और पिछले कई वर्षों की तरह भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण उभरी गतिरोध की स्थिति अब दूर हो गई है.

सार्क के दोनों बड़े देश भारत और पाकिस्तान, आपस में शांति के कई प्रयास कर रहे हैं जिससे समझा जा रहा है कि सम्मेलन में आर्थिक और सामाजिक विषयों पर सहयोग के मुद्दों पर बात आगे बढ़ सकती है.

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ एस डी मुनि का कहना है कि भारत और पाकिस्तान को इस मामले में अपनी आशंकाओं को दूर करना होगा.

उन्होंने कहा, "अभी तक दोनों ही देशों ने सार्क को कोई ख़ास महत्व नहीं दिया है. पाकिस्तान समझता है कि सार्क के मज़बूत होने से भारत की इस क्षेत्र में पैठ बढ़ेगी जब कि भारत को डर है कि शायद उसके छोटा पड़ोसी ज़्यादा रियायतों के लिए इकट्ठा होकर उसपर अनुचित दबाव डालेंगे."

एस डी मुनि ने कहा, "आज के वैश्वीकरण के युग में क्षेत्रीय संगठन, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों में काफ़ी अहम भूमिका निभा रहे हैं. ऐसे में द्विपक्षीय तनाव, यहाँ तक कि युद्ध से भी क्षेत्रीय संगठन की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं होना चाहिए."

पहला पाकिस्तान दौरा

भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह का मंत्रिपद संभालने के बाद पाकिस्तान का ये पहला दौरा है.

हालाँकि पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी से पिछले दो महीने में वे दो बार मिल चुके हैं.

कसूरी और मुशर्रफ़ से मिलकर नटवर सिंह दोनों देशों के बीच जारी शांति वार्ता से जुड़े विभिन्न पहलुओं की चर्चा करेंगे.

हालाँकि उन्होंने कहा है कि भारत अभी भी सीमा पार से होनेवाली घुसपैठ से चिंतित है और उसकी चर्चा वे पाकिस्तानी नेताओं से करेंगे.

उधर पाकिस्तान भी जम्मू-कश्मीर नियंत्रण रेखा पर भारत द्वारा बाड़ लगाए जाने और रक्षा बजट में लगभग 17 फ़ीसदी बढ़त को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुका है.

मगर विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश इन मुद्दों को लेकर सार्वजनिक चर्चा ज़रूर कर रहे हैं लेकिन इससे आपसी बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि दोनों ही शांति प्रयासों पर अपनी कटिबद्धता दोहरा चुके हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार भारत और पाकिस्तान दोनों पर आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव इतना ज़्यादा है कि बातचीत से पीछे हटना उनके लिए आसान नहीं है.

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