|
शिवसेना से नाराज़ समलैंगिक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो समलैंगिक महिलाओं के संबंधों पर बनी फ़िल्म 'गर्लफ़्रॅंड' के बाज़ार में आने से समलैंगिकता पर उठा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा. मुंबई, दिल्ली और वाराणसी में हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता फ़िल्म के पोस्टर जला चुके हैं और कई जगह तोड़फोड़ कर चुके हैं. समलैंगिक लोग भी फ़िल्म का विरोध ये कहते हुए कर रहे हैं कि इस फ़िल्म से उनकी छवि ख़राब करने की कोशिश की गई है. लेकिन शनिवार को 50 समलैंगिक मर्द और औरतों ने मुंबई में शिव सेना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरु कर दिया. प्रदर्शन करते हुए जब उन्होंने शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे से मिलने की कोशिश की तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया. समलैंगिक पुरुष और महिलाएँ शिव सेना से इसलिए नाराज़ हैं कि 'शिव सेना समलैंगिक समुदाय को भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं मानती और फ़िल्म का विरोध हिंसा से प्रकट करती है.' नितिन करानी जो समलैंगिकता पर मुंबई से निकलती पत्रिका - बॉंबे दोस्त - में काम करते हैं, ने बीबीसी को पुलिस हिरासत से बताया,"पुलिस का कहना है कि हमने प्रदर्शन की इजाज़त नहीं ली चाहे हमने इसके बारे में उन्हें पहले ही सूचित कर दिया था." उन्हें नाराज़गी थी कि शिव सेना समलैंगिकता को अनैतिक मानती है. उनका कहना था कि शिव सेना उनसे बातचीत करे और उन्हें समझने की कोशिश करे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||