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भारत और श्रीलंका के विदेश मंत्री मिले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत मे नई सरकार बनने के बाद सोमवार को श्रीलंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगमार एक उच्च स्तरीय बैठक में पहली बार भारतीय नेताओं से मिले. लक्ष्मण कादिरगमार ने भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह को श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच चल रहे शांति प्रयासों का ब्यौरा दिया. श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारातुंगा के क़रीबी माने जाने वाले लक्ष्मण कादिरगमार ने हाल ही में कहा था कि उनकी सरकार शांति वार्ता में भारत की सक्रिय भूमिका की संभावनाएँ तलाश कर रही है. पिछले सप्ताह नार्वे के शांति दूत एलटीटीई और सरकार के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू कराने में असमर्थ रहे थे. 1990 में श्रीलंका से सेना हटाने के बाद भारत ने इस समस्या से हाथ खींच लिया था. क़रीबी रिश्ते श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे की सरकार भारत के साथ सैनिक साज़ो-सामान और प्रशिक्षण लेने पर बातचीत कर रही थी. लेकिन एलटीटीई को ये स्वीकार नहीं था. राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारातुंगा ने कहा है कि उनकी सरकार तमिल विद्रोहियों के साथ शांति वार्ता दोबारा शुरू करेगी लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई समय निर्धारित नहीं किया है. हालाँकि नार्वे की मध्यस्थता से दोनों के बीच दो साल से युद्धविराम जारी है लेकिन पिछले साल अप्रैल में तमिल विद्रोहियों ने ये कहकर वार्ता में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था कि सरकार उत्तर और पूर्व के बारे में किए गए वायदों पर क़ायम नहीं रह सकी. तमिल विद्रोहियों ने ये चेतावनी भी दी है कि अगर उन्हें स्वायतत्ता नहीं दी गई तो वो अपना संघर्ष जारी रखेंगे. पिछले 20 साल के इस गृह युद्ध में अब तक 60,000 लोगों की जान जा चुकी हैं. |
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