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एलटीटीई के साथ बातचीत जुलाई में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि तमिल चरमपंथी संगठन एलटीटीई के साथ बातचीत जुलाई में फिर से शुरू हो जाएगी. बीबीसी सिंहला सेवा के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री राजपक्षे ने कहा कि विपक्षी यूनाइटेड नेशनल पार्टी ने पहले ही कह दिया है कि वह एलटीटीई के साथ वार्ता का समर्थन करेगी. सोमवार को प्रधानमंत्री राजपक्षे ने नॉर्वे के विदेश मंत्री जॉ पीटरसन से मुलाक़ात की जो एलटीटीई से बातचीत करने के सिलसिले में श्रीलंका में हैं. पीटरसन ने राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग से भी बातचीत की.पीटरसन मंगलवार को किलीनोची जाकर एलटीटीई के नेताओं से मिलेंगे. हालाँकि उन्होंने हाल के दिनों में कुछ एलटीटीई विद्रोहियों और एक सैनिक के मारे जाने पर चिंता जताई और चेतावनी भी दी कि ऐसी घटनाओं से शांति प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है. कोशिश श्रीलंका में नई सरकार के गठन के बाद नॉर्वे ने नए सिरे से सरकार और एलटीटीई के बीच शांति वार्ता शुरू कराने की कोशिश शुरू कर दी है.
एलटीटीई के वार्ताकार एंटन बालासिंघम भी बातचीत के लिए राज़ी हैं और उन्होंने इसी सिलसिले में पिछले दिनों एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण से मुलाक़ात भी की. पिछले महीने राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग की अगुआई वाले गठबंधन ने संसदीय चुनाव में जीत हासिल की थी और उसके बाद महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाया गया था. हालाँकि राष्ट्रपति कुमारतुंग ने रनिल विक्रमसिंघे की सरकार इसी आधार पर बर्ख़ास्त की थी कि वे एलटीटीई को ज़रूरत से ज़्यादा राहत दे रहे हैं. लेकिन अब वे ख़ुद एलटीटीई से शांति वार्ता को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने अपना रुख़ कुछ नरम भी कर लिया है. |
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