|
आख़िर किस किस को मंत्री बनाएँ मनमोहन? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोनिया गाँधी के 'मार्गदर्शन' में मनमोहन सिंह अपना मंत्रिपरिषद बनाने की कोशिश में जुटे हैं लेकिन अभी से उन्हें आगे आने वाली समस्याओं की झलक मिलने लगी है. कांग्रेस के भीतर तो मंत्री पद पाने की होड़ चल ही रही है, कांग्रेस पार्टी के सहयोगी दलों ने भी अधिक से अधिक और बेहतर से बेहतर पद पाने के लिए तोल-मोल शुरू कर दिया है. कांग्रेस के प्रमुख साझीदार राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने यह कहकर मुश्किलें बढ़ा दी हैं कि वे सरकार में शामिल होने के बारे में पुनर्विचार कर रहे हैं. गुरूवार को लालू यादव यह कहकर दिल्ली से पटना चले गए कि वे अपनी पार्टी में विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई फैसला लेंगे, पहले उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा था कि वे सरकार में शामिल होंगे.
कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं अर्जुन सिंह और आरके धवन ने लालू यादव से मुलाक़ात करके उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन वे बिना कोई वादा किए पटना चले गए. अपने रवैए में इस बदलाव का कोई कारण उन्होंने नहीं बताया लेकिन अटकलें तेज़ हैं कि वे गृह मंत्रालय की माँग कर रहे थे जिसे कांग्रेस ने मानने से इनकार कर दिया. कांग्रेस के महासचिव ऑस्कर फ़र्नांडीस ने पत्रकारों को बताया कि सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह मंत्रिपरिषद के गठन के सिलसिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी दलों से लगातार बातचीत कर रहे हैं और यह "काम बिना किसी दिक्कत के पूरा हो जाएगा." राजीव गाँधी की पुण्यतिथि के मौक़े पर सोनिया गाँधी हर वर्ष तमिलनाडु के श्रीपेरूम्बदूर जाती रही हैं जहाँ उनकी हत्या हुई थी लेकिन इस बार मंत्रियों का नाम तय करने की मशक्कत के बीच वे दिल्ली से बाहर नहीं निकल पाईं. उन्होंने दिल्ली में राजीव गाँधी की समाधि वीरभूमि पर मनमोहन सिंह के साथ जाकर अपने दिवंगत पति को श्रद्धांजलि दी. माँग कांग्रेस के एक और सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि मंत्री पद के बँटवारे के लिए कोई तय फॉर्मूला होना चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक़ अनवर ने कहा है कि कांग्रेस सहयोगी दलों को बताए कि मंत्रिपरिषद के गठन के बारे में उसकी योजना क्या है.
पाँच सांसदों वाले साझीदार झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन ने पत्रकारों के साथ बातचीत में बेहिचक कहा कि वे कोयला, खान, ऊर्जा और इस्पात जैसे मंत्रालय चाहते हैं. इसी तरह, लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान ने खुलकर तो नहीं कहा है कि लेकिन माना जा रहा है कि उनकी नज़र रेल मंत्रालय पर है. तमिलनाडु में कांग्रेस की साझीदार करूणानिधि की पार्टी द्रमुक ने भी कहा है कि वे सरकार में शामिल होंगे. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मनमोहन सिंह पहली बार में बड़ा मंत्रिमंडल नहीं बनाएँगे ताकि सहयोगी दलों के रूख़ को देखते हुए मंत्रियों की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश रहे. पहले तो यह तय होना है कि किसके खाते से कितने मंत्री बनेंगे, फिर ये पेंच है कि उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री का होगा या राज्य मंत्री और उप मंत्री का, इसके बाद सवाल उठेंगे कि किसे कौन सा मंत्रालय मिले. ज़ाहिर है, कांग्रेस के नेतृत्व में पहली बार गठबंधन सरकार बनने जा रही है, सहयोगी दलों और कांग्रेस के बीच रूठने मनाने का खेल अब शुरू हो चुका है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||