|
सीटू ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में मई दिवस की वैसे तो बड़ी धूम रही लेकिन इस बार ख़ास बात ए थी कि सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मज़दूरों के अधिकारों की जगह निजीकरण की नीतियों के ख़िलाफ जंग छेड़ने पर ज़्यादा ज़ोर दिया. वामपंथी नेताओं का कहना है कि आज वक़्त का तक़ाज़ा है कि मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा से पहले उनके रोज़गार बचाए जाए. इस अवसर पर विभिन्न मज़दूर संगठनों के महासंघ सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स - सीटू ने कोलकाता मौन्यूमेंट मैदान पर एक विशाल रैली का आयोजन किया. राज्य के सीटू अध्यक्ष श्यामल चक्रवर्ती ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मचारी वर्ग को बचाने के लिए वर्तमान केंद्र सरकार को बदल डालना बहुत ज़रूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की वैश्वीकरण और उदारीकरण की नीतियों की वजह से मज़दूरों की हालत और निराशाजनक हो गई है. श्री चक्रवर्ती ने ये भी कहा कि किसी भी अन्य दल के साथ तब तक गठबंधन की संभावना नहीं है जब तक कि वे अपनी मज़दूर विरोधी नीतियाँ नहीं छोड़ देते. राज्य भर में जितने भी मई दिवस समारोह आयोजित किए गए वे सभी चुनावों के असर से बच नहीं पाए. अधिकतर नेताओं ने कहा कि कर्मचारी वर्ग के कथित अंधकारपूर्ण भविष्य में सुधार के लिए विकल्पों की बेहद कमी है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||