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पीएम के तख़्त के लिए बिछी बिसातें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अभी न सूत है न कपास है लेकिन जुलाहे लट्ठ लेकर तैयार हैं. हालांकि अभी चुनाव निपटे नहीं हैं और दो चरणों के मतदान होने बचे हैं लेकिन एक्ज़िट पोल के नतीजों के बाद देश में यह चर्चा शुरु हो गई है कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा. ख़बरें हैं कि कांग्रेस ने कह दिया है कि उनकी ओर से सोनिया गाँधी ही प्रधानमंत्री होंगी. उधर शरद पवार कह ही चुके हैं कि वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं. कुछ और क्षेत्रीय नेताओं की सुगबुगाहट बढ़ गई है जिनमें लालू-मुलायम के नाम आ रहे हैं. लेकिन सबसे ज़्यादा शोर समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव का है. वैसे यह चर्चा तो काफ़ी समय से चल रही है कि इन चुनावों के बाद समाजवादी पार्टी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी लेकिन अब चर्चा उससे आगे की होने लगी है. इस चर्चा के बाद लोगों की राय भी आने लगी है. लालू प्रसाद यादव ने कह दिया है कि वे (और उनका गठबंधन) किसी भी सूरत में मुलायम सिंह को प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे. मुलायम सिंह ने जिस तरह बिहार में अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे हैं उससे लालू प्रसाद यादव पहले से ही बहुत नाराज़ हैं. सपा- भाजपा का झगड़ा उधर कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में दिलचस्प नोंकझोंक चल रही है.
वैसे यह तो राजनीतिक विश्लेषक कई दिनों से कह रहे थे कि मुलायम सिंह यादव जब से मुख्यमंत्री बने हैं उनका रुख भाजपा के प्रति कुछ नरम नज़र आ रहा है. लेकिन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मानों आग में घी डाल दिया. उन्होंने कह दिया कि भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बहुत सैंद्धांतिक फ़र्क नहीं है. इसके बाद यह चर्चा होने लगी कि यदि एनडीए को बहुमत से कम सीटें मिलीं तो समाजवादी पार्टी एनडीए को समर्थन दे सकती है. इसके बाद से समाजवादी पार्टी के नेता बौखलाए हुए भाजपा को कोस रहे हैं. उत्तरप्रदेश में मुस्लिम वोटों के भरोसे राजनीति करने वाली सपा के लिए यह मुसीबत की तरह है. वाजपेयी के बयान के अगले ही दिन से जो सफ़ाई देनी शुरु की तो आज तक ज़ारी है. अमर सिंह का ताज़ा बयान है कि यदि सपा और भाजपा में सैद्धांतिक फ़र्क नहीं है तो वाजपेयी जी को सपा में शामिल हो जाना चाहिए. अमर सिंह ने शर्त रखी है कि सपा में आने से पहले वाजपेयी जी को बेस्ट बेकरी कांड की सफ़ाई देनी होगी. वैसे एक राजनीतिक विश्लेषण यह है कि भाजपा को लग रहा है कि यदि किसी तरह उत्तरप्रदेश में मुस्लिम वोट कांग्रेस की ओर चले जाएँ तो भाजपा की सीटें बच सकती हैं. इसलिए भाजपा सपा को नुक़सान पहुँचाने में जुट गई है. हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का कहना है कि वे जितना मुलायम सिंह को जानते हैं उससे उनको नहीं लगता कि वे एनडीए को समर्थन देंगे. उनका कहना था कि यदि वे ऐसा करेंगे तो राजनीति छोड़कर ही करेंगे. |
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