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आसान नही चुनौतीः वाजपेयी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वीकार किया है कि लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग की चुनौती उतनी आसान नहीं है जितनी उम्मीद की जा रही थी. समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए विशेष इंटरव्यू में प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा कि गठबंधन के समर्थकों ने इन चुनावों को कोई चुनौती नहीं मानी थी लेकिन ऐसा नहीं है. वाजपेयी ने कहा, "मैं इसे स्वीकार नहीं करता कि लोकसभा चुनावों में कोई मुक़ाबला नहीं है." लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजग के लिए कोई चिंता की बात नहीं है. भारत में सोमवार को लोकसभा के तीसरे दौर के चुनाव हो रहे हैं जिसमें भारतीय जनता पार्टी के कई शीर्ष नेताओं की सीटें भी शामिल हैं. इसके बाद पाँच मई और 10 मई को भी मतदान होने हैं जिसके बाद 13 मई को मतगणना शुरू होगी. संकेत एक्ज़िट पोल को ज़्यादा महत्व न देते हुए वाजपेयी ने कहा कि ये सर्वेक्षण संकेत भर होते हैं लेकिन कभी-कभी ये उलटे-पुलटे भी हो जाते हैं. ज़्यादातर एक्ज़िट पोल में राजग को बढ़त दिखाया गया है लेकिन काँग्रेस की अगुआई वाले विपक्ष की सीटों में बढ़ोतरी की बात कही गई है. प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा, "चुनाव हमारी उम्मीदों के मुताबिक़ ही हो रहे हैं और हमें पूरा भरोसा है कि हमें बहुमत मिल जाएगा." चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी के साथ आने के बारे में चल रही अटकलों पर टिप्पणी करते हुए वाजपेयी ने कहा, "वे (समाजवादी पार्टी के लोग) चीखने-चिल्लाने लगेंगे. कई संभावनाएँ हैं. लेकिन उनके बारे में विस्तार से बताना मुश्किल है." वाजपेयी ने दोनों पार्टियों की सोच में समानता के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनका मतलब यह था कि दोनों पार्टियाँ लोकतंत्र की रक्षा, आपातकाल की ख़िलाफ़त और विदेशी मूल के मुद्दे पर एक विचार रखती हैं. गठबंधन को चलाने में अपनी चिंता वाले कथित बयान के बारे में वाजपेयी ने कहा कि उनके कहने का मतलब थी गठबंधन में शामिल पार्टियों की संख्या कम रहनी चाहिए. वाजपेयी का इशारा था कि एक सदस्य वाली पार्टियों से गठबंधन को दूर ही रहना चाहिए. |
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