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लालजी टंडन वाजपेयी के प्रतिनिधि नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ लालजी टंडन ने घोषणा की है कि वे लखनऊ संसदीय सीट पर प्रधानमंत्री वाजपेयी के चुनाव संयोजक नहीं रहेंगे. उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी ने लालजी टंडन के ख़िलाफ़ मतदाताओं को घूस देकर प्रभावित करने का मामला दर्ज किया था जिसके बाद उन्होंने यह फ़ैसला किया है. मुख्य चुनाव अधिकारी विजय शर्मा ने कहा है कि लालजी टंडन के ख़िलाफ़ लखनऊ के महानगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़रीबों में साड़ी बाँटने के लिए समारोह का आयोजन भारतीय जनता पार्टी ने ही मतदाताओं को प्रभावित करने के इरादे से आयोजित था. ग़ौरतलब है कि इस समारोह में भगदड़ मचने से 21 महिलाओं की जानें चली गई थी. यह समारोह लालजी टंडन के जन्म दिन के अवसर पर एक सामाजिक संस्था ने आयोजित कराया था. लालजी टंडन के अलावा एक अन्य नेता ब्रजेन्द्र मुरारी यादव के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. शर्मा ने बताया कि यह मामला चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार ही दर्ज कराया गया है. चुनाव आयोग ने इस बारे में कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी को भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस मामले में आयोग ने भाजपा नेता लालजी टंडन के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 171-बी के तहत मुकदमा चलाने के लिए भी कहा था. इस बीच कांग्रेस ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए माँग की थी कि लखनऊ लोकसभा सीट पर चुनावी प्रक्रिया फिर से शुरू की जाए. पार्टी प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने माँग की है सीट के लिए नए सिरे से अधिसूचना जारी की जाए और फिर से नामांकन कराया जाए. धारा 171-बी रिश्वत देने के मामले में लागू होता है और आयोग का कहना है कि पहली नज़र में यह मतदाताओं को रिश्वत देने का मामला दिखता है. |
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