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गुरुवार, 15 अप्रैल, 2004 को 13:56 GMT तक के समाचार
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पालाबदल पहलवानों का चुनावी दंगल

धीरेंद्र अग्रवाल
धीरेंद्र अग्रवाल इस बार राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार हैं
झारखंड की चतरा लोकसभा सीट में सभी प्रमुख उम्मीदवार दलबदलू हैं.

यहाँ मुख्य मुक़ाबला भाजपा, राष्ट्रीय जनता दल और एक स्वतंत्र उम्मीदवार के बीच है.

इसके अलावा चुनाव बहिष्कार की माँग करने वाले एक माओवादी संगठन के एक सदस्य भी पाला बदलकर चुनावी राजनीति में उतरे हैं.

चतरा के लगभग साढ़े दस लाख मतदाताओं का अगर सिर चकरा रहा हो तो इसमें आपको हैरत नहीं होनी चाहिए.

इस संसदीय क्षेत्र में तड़के छह बजे हमारा पहला पड़ाव था राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार धीरेंद्र अग्रवाल का दफ्तर.

राजद नेता अग्रवाल पिछले चुनावों में भाजपा के प्रत्याशी थे, उनके सामने थे नागमणि जो कि लालू यादव ब्रांड की राजनीति करते थे.

आज वे अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का जाप कर रहे हैं और भाजपा की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं.

तीसरे भी

इतना ही नहीं, बिहार में भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में से एक, इंदर सिंह नामधारी इन दिनों जनता दल यूनाइटेड के तीर चला रहे हैं.

हमने धीरेंद्र अग्रवाल से पूछा कि क्या जनता इन बदलावों से भ्रमित तो नहीं हो गई ?

 यहाँ के लोग भ्रमित नहीं होते. यहाँ के लोगों का मानना है कि भाजपा ने मेरी बलि चढ़ाई है. यहाँ के भाजपा कार्यकर्ता भी मेरे साथ हैं
धीरेंद्र अग्रवाल

इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘यहाँ के लोग भ्रमित नहीं होते. यहाँ के लोगों का मानना है कि भाजपा ने मेरी बलि चढ़ाई है. यहाँ के भाजपा कार्यकर्ता भी मेरे साथ हैं.’’

अग्रवाल मूल तौर पर गया के रहने वाले हैं और पिछली बार वे नागमणि से चुनाव हारे थे.

पर अब नागमणि ने लालटेन छोड़ कमल को थाम लिया है, वे आस वाजपेयी की आंधी पर लगाए बैठे हैं और कहते हैं भाजपा का कार्यकर्ता उनके साथ हैं.

वे कहते हैं, “देखिए, थोड़ा भ्रम है सब पार्टियों में भाजपा कार्यकर्ता बहुत चरित्रवान हैं और हमारे साथ शत प्रतिशत कार्यकर्ता हैं.”

वहीं इंदर सिंह नामधारी साफ छवि के नेता के रूप में अपने आप को पेश कर रहे हैं.

नामधारी का वैसे कोई वोट बैंक नहीं है पर अपनी छवि के सहारे वे यहाँ कुर्सी पर अधिकार जमाना चाहते हैं.

राजद उम्मीदवार को केवल वैश्य समाज से ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों से भी आशा है.

अग्रवाल कहते हैं, ‘‘यहाँ के लोग मुझे सांप्रदायिक नहीं मानते. इसलिए सभी का वोट मुझे मिलेगा.”

लालू के नज़दीकी रहे नागमणि भाजपा के उम्मीदवार हैं
नागमणि

वहीं नागमणि का भी दावा है कि “कुशवाहा समुदाय के साथ यादव और मुस्लिम वोटर भी उनके साथ होगा.”

इस इलाक़े में माओवादियों का प्रभाव है इसिलए सभी मतदान पर चुनाव बहिष्कार की माँग का असर ज़रूर दिखेगा.

अब आया राम-गया राम की होड़ में माओवादी पार्टी एमसीसी में भी शुरू हो गई है.

पार्टी के सदस्य राम लाल उराँव चतरा से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे हैं.

उराँव के एक समर्थक गोपाल यादव कहते हैं, “हर समय तो परिवर्तन होता ही रहता है. अब इनको लोकतंत्र में विश्वास हुआ तो उन्होंने चुनाव लड़ना शुरु कर दिया’’.

अब चुनाव के नतीजे ही बताएँगे कि सीट और सत्ता की खातिर दल-बदल करने वालों को जनता कितना पसंद करती है.

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