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रविवार, 04 अप्रैल, 2004 को 08:51 GMT तक के समाचार
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विदेशी मूल क्या राजनीतिक मुद्दा है?

सोनिया गाँधी
सोनिया गाँधी के राजनीति में आने के बाद से ही विदेशी मूल एक चुनावी मुद्दा है
जैसा कि अपेक्षित ही था जैसे-जैसे चुनाव की गर्मी बढ़ती जा रही है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के विदेशी मूल का मुद्दा फिर केंद्र में आता जा रहा है.

भारतीय जनता पार्टी लगातार कहती आ रही है कि वह विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन पार्टी के सभी बड़े नेता आख़िरकार विदेशी मूल का मामला छोड़ नहीं पा रहे हैं.

कांग्रेस हर बार की तरह इस बार भी इस मामले में रक्षात्मक ही दिख रही है.

इस विवाद की जड़ें सोनिया गाँधी के जीवन परिचय में है जिसमें लिखा हुआ है कि उनका जन्म इटली में हुआ था. हालांकि वे भारत की नागरिक हैं और क़ानूनी रुप से उनको किसी भी पद पर बैठने से नहीं रोका जा सकता.

बहस

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आंध्र प्रदेश में एक चुनावी रैली में कहा है कि विदेशी मूल के किसी व्यक्ति को सर्वोच्च पद पर बैठाने का मामला गंभीर मामला है और इस पर पूरे देश में बहस होनी चाहिए.

दूसरी ओर उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि विदेशी मूल का मुद्दा राजनीतिक मुद्दा है.

हालांकि भाजपा के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी से जब पूछा गया कि क्या भाजपा इस विषय पर जनमत संग्रह करवाना चाहेगी तो उन्होंने इस सवाल को टाल ही दिया.

दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने इस सवाल का तो जवाब नहीं दिया कि क्या विदेशी मूल का मुद्दा राजनीतिक मुद्दा है लेकिन उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाए कि विकास के मुद्दे पर भागने के लिए वे यह मुद्दा उछाल रहे हैं.

वैसे कांग्रेस के दूसरे प्रवक्ता कपिल सिब्बल इस मामले में कांग्रेस के दूसरे नेताओं की तुलना में ज़्यादा खुलकर बहस करने को तैयार नज़र आते हैं.

उनका कहना है कि यदि भाजपा के लोग सोनिया गाँधी को विदेशी मूल का मानते हैं तो उनको प्रधानमंत्री बनाने से रोकने के लिए संविधान संशोधन करना पड़ेगा.

उनका कहना है कि इसके लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत भाजपा कभी नहीं जुटा पाएगी.

आडवाणी को लेकर भी सवाल

आडवाणी
आडवाणी का जन्म कराची में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है

किसी कांग्रेस नेता ने कह दिया कि यदि सोनिया गाँधी विदेशी मूल की हैं तो लालकृष्ण आडवाणी भी तो कराची में पैदा हुए थे और इस नाते वे भी विदेशी मूल के ही हैं.

इस आरोप के जवाब में आडवाणी ने कहा कि ऐसा आरोप लगाना उन लाखों लोगों का अपमान है जो विभाजन के समय भारत में आ गए थे.

उन्होंने सफ़ाई देते हुए कहा कि जिस कराची में उनका जन्म हुआ वो अविभाजित भारत का हिस्सा था और इस नाते तो वे भारतीय ही हैं.

चुनाव आयुक्त की चिंता

मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति का कहना है कि राजनीतिक नेताओं को किसी दूसरे नेता पर व्यक्तिगत आरोप नहीं उछालना चाहिए.

पता नहीं उनका इशारा किन आरोपों और प्रत्यारोपों की ओर था.

एक अख़बार में तो ख़बर है कि वे चाहते थे कि सोनिया गाँधी के विदेशी मूल को चुनावी मुद्दा बनाने को लेकर भी चुनाव आयोग कुछ करे लेकिन उनके साथी चुनाव आयुक्तों ने सलाह दी कि यह चुनाव आयोग का मसला नहीं है.

जो भी हो अभी तो पहले दौर का चुनाव प्रचार चल रहा है.

पत्रकारों को लगता है कि यह मामला अभी और उछलेगा और आरोप प्रत्यारोप का दौर अभी और आगे जाएगा.

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